सोमवार, 13 अप्रैल 2020

सुर्खियों के चक्कर मे तैर रही थी लाश : टाइटैनिक

सुर्खियों के चक्कर में तैर रही थी लाश : टाइटैनिक 

मानवीय सभ्यता का विकास का यह दौर इतिहास में हमेशा याद किया जायेगा, 1912 में जो घटना समुद्र में घटी उसके लिए किसी एक को दोष देने से अच्छा है सुर्खियों में रहने वाली जहाज को दोष देना उचित है। कभी न डूबने वाली इतिहास का भाप से चलने वाला उस वक़्त का सबसे बड़ा जहाज टाइटेनिक अपने पहली सफर साउथम्पटन से न्यूयॉर्क जाते वक्त ही जल के तल में समा गई। इतिहास का वह काला दिन सभी के जहन में आज भी जिंदा है। "समुद्र का दिल" हीरा समुंदर की लहरों में खो गई, विरासत में टाइटेनिक के मलबे के सिवाय कुछ मिला तो वह उस दिन प्रेस वालो को सुर्खियों का खजाना, प्रथम पृष्ठ में बड़े बड़े अक्षरों में कभी न डूबने वाली जहाज का भयानक अंत, खौपनाक मंजर जिसे दिल सुनकर कांप जाये। 20वी सदी की सबसे बड़ी समुद्री आपदा जिसे याद कर रूहे कांप जाती है, वह मंजर कभी देखने को न मिले। भाप से चलने वाली उस समय की सबसे बड़ी जहाज, कभी न डूबने वाली हमेशा सुर्खियों में रही, अपनी यात्रा 10 अप्रैल 1912 के चार दिन बाद 14 अप्रैल 1912 जल समाधि बन गई। बर्फ की चट्टान मिलने के बाद भी तेज रफ्तार से दौड़ रही थी, वक़्त रहते मोड़ने का अनुमान, एक कीर्तिमान स्थापित करने के लिए, एक बार मे समय के पहिया को समेटना चाहते थे, दूरियां को चंद घण्टे पहले तय करने की जिद्द 1517 निर्दोष को साथ मे लेकर टाइटैनिक डूब गई, इतिहास का सबसे बड़ी दुखद घटना में से एक है जब इतने लोग समुन्दर की लहरों में खो गये, किसी का ऐतेबार नही किया। रेडर भी काम नही आया और तो और उस जमाने के नामचीन इंजीनियर, एक्सपर्ट और डिज़ाइनर आदि की  कीमित देन अपनी पहली यात्रा के दौरान ही अपनी अंतिम यात्रा किया जिसका जिक्र हमेशा होगा, 4चिमनी प्रभावशाली रूप देने के लिए लगाए गए थे जिसमें तीन ही काम करता था। प्रेस के लिए सुर्खियों में हमेशा रही। 1500 लोग के साथ टाइटेनिक दफन हो गई, जब टाइटेनिक डूबी उस वक़्त 6 लोगो को बाद में सभी नावों को आपस मे जोड़कर रक्षा दल आई तब बचाये उस ठंडे पानी मे महज 20मिनट तैरना मुश्किल था पानी बहुत ज्यादा ठंडा था, बच पाना नामुमकिन था। नाव में 700 लोगो को सिर्फ इंतजार करना था, अपने मुक्ति के लिए जो उन्हें कभी न मिली, अपने आंखों के सामने समुन्दर में समाते हुए लोगो का दर्द दफन हो गई। टाइटैनिक कीमतें चीजों से बना था, उस जमाने के सारे विशेषज्ञों के राय एक जहाज बनाने के लिए जो जरूरत होता है उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया था, वह सभी चीजें जरूरत के चीजे शामिल किया गया था। ये आपदा मानवीय संवेदना की याद हमेशा दिलाएगी, यह समुद्री आपदा ही नही बल्कि समय का चक्रव्यूह था जो काल बनकर आया था जो कभी न डूबने वाली टाइटेनिक को पहले सफर में ही ले डूबी। इतिहास में इसका जिक्र बहुत है लेकिन औरत के जज्बात समुन्दर की गहराई के सामने है, टाइटेनिक को समझना आसान नही है इसे महसूस कर सकते है, बहुत रिसर्च हुआ और होता रहा है इतिहास में इसे झुठलाया नही जा सका, समय के पहिया में टाइटेनिक हमेशा के लिए कैद हो गया है, हार्ट ऑफ ओसियन समुन्दर की लहरों में खो गई, हार्ट ऑफ ओसियन को पाने की इच्छा रखने वाले वैज्ञानिको ने बहुत खोज किया लेकिन रॉस महिला यात्री जिसके मंगेतर के जैकेट में होता है उनके हाथ लग जाता है वह अपने उम्र के अंत समय में एक रीसर्च के दौरान समुन्दर के लहरों में जहाँ टाइटेनिक डूबा रहता है वहाँ फेंक देती है समुद्र की लहरे उसे अपने आप मे आगोश लेती है। प्रेस के सुर्खियों में हमेशा के लिए छाप छोड़कर गया और इतिहास का भयानक आपदा मानवीय जीवन का एक मौत भरी रात रही थी समुन्दर की गहराई में सभी चीज समा गया। सुर्खियों में रहने वाला टाइटैनिक जीवन मे जहाजों का सफर का एक असवाल पैदा करने वाला पल रहा है, सभी विशेषज्ञों की विचारों को मात दे गई, एक गलती समय को कैद करने की विशाल जहाज को लेकर डूब गई। नौका दल कम थी लोगो को बचाना मुस्किल था कोई दूसरी जहाज घण्टो दूर थी ऐसे में जो बचे थे उनको मौत से कोई नही रोक सकती थी 6 लोग जो बचे वह ठंडे पानी मे टीके रहे जब नौका बचाव दल आई बाकी सभी लाश बनकर तैर रही थी, इतिहास को कैद करने वाला समय, विरासत में विशाल टाइटैनिक का मलबा और साथ मे बहुत से लोगो को अंत की कहानी के सिवाए कुछ नही मिला। 

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

गुरुवार, 12 मार्च 2020

कोरोना से लड़ रहा है विश्व

कोरोना से लड़ रहा है विश्व


यह वायरस चीन के वूहान शहर से शुरु हुआ जो आज विश्व की समस्या बन गई। चीन हमेशा से सुर्खियों में रहना चाहता रहा है और समय समय पर रहता भी है, आज चमगादड़ के रस से दुनिया मे छा गया है। कोरोना वायरस सपने की तरह आया जो सभी को झकझोर दिया, यह आग की तरह फैला वही चीन में लगभग 5 करोड़ लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है, यह आग की तरह फैल गया विकासशील देशों को तो छोड़ा नही वही विकसित देशों की सीमा भी लांघ गया। 


विकासशील देश मे सुमार चीन भूल गया क्या करना चाहिए क्या नही, अपने सपनो पर पानी फेर दिया। मौत के दरवाजे पर अबतक लगभग विश्व मे 90000 लोग खड़े है, वायरस जहर की तरह शरीर मे फैल गया, वही यह आंकड़ा दहलीज पर कर रहा है। लोग लड़ रहे है अपने स्वभिमान से, वायरस का फैलना अपने आप मे भयंकर मंजर है जो कभी किसी ने देखा था न देखा रहा है।


ईरान में मृत्यु दर बढ़ रही है वही चीन में तो मृत्यु दर तेजी से बढ़ी, मृत्युदर में देखा गया वृद्धावस्था में जो लोग है उनकी मृत्युदर देखा गया, युवा अवस्था मे इम्युनिटी अत्यधिक होती है जिसे प्रभावित कम हुई वही वृद्ध में कोरोना का कहर बरपा है, महिलाओं में यह कम है, तापमान का प्रभाव लोगो मे पड़ा और कोरोना करोड़ो लोगो को आग की तरह संकट में डाल दिया लाखो लोग इसे शिकार हुए वही भारत को भी छू लिया तकरीबन 50-60 लोग संदिग्ध पाये गये, कोरोना वायरस को  Covid19 दिया गया। मानवीय आपदाओं का वह मंजर है जो इतिहास में कभी नही हुआ था खूनी खेल लोग मौत के दरवाजे पर खड़े है, जीवन और मौत से लड़ रहे है।


इसे बचने के लिए सेनेटाइजर व मास्क का उपयोग करे। हाथ को साबुन या एल्कोहल से धोया, छीकते वक्त कपड़े का उपयोग करे, संक्रमित होने से बचे, निमोनिया होने पर प्राथमिक उपचार तुरंत ले और साथ ही अपने आप को किसी भी बीमारी से बचाकर रखे। मानवीय संवेदनाओं को ध्यान रखते हुए किसी की मौत न हो उसके लिए दुआ के सिवाये कुछ नही बचा है क्योंकि दुनिया मे कोरोना से बचने के उपाय अबतक ढूंढ नही पाये है ऐसे में अब भगवान से ही उम्मीद है कि वह सब अच्छा करे हम सिर्फ अपने आपको इम्यून कर सकते है हमारी इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते है। आयुर्वेद के नियमों का पालन करके हम अपने आप को बचा सकते है, अपने इम्यून सिस्टम को बढ़ा सकते है। तुलसी, लौंग, अदरक तथा जड़ी बूटियां आदि का सेवन करे व हरे सब्जियों का उपयोग करे।


कोरोना वायरस सीधे लफ्जो में कहो तो समय से पहले मौत है, यह एक ऐसे समय मे आया जब विश्व विकास की नई परिभाषा और मौत को मात देने में लगी हुई है। मानव सभ्यता का विकास पर्यावरण पर अधिकार स्थापित करने के लिए हमेशा से रहा है जो आज संतुलन बनाये जाने की आवश्यकता है तब जाकर हम कोरोना जैसे वायरस से लड़ सकते है। वैसा काम ही न करे कि भयानक मंजर आये, लोगो को सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है, जहाँ कोरोना फैल रहा है वहाँ धैर्य की जरुरत है और अपने आप को संक्रमित होने से बचाने की, दुआ के सिवाये लोगो के पास कोई रास्ता नही है ऐसा मानना है, लोगो के जज्बात समन्दर की तरह गहरे है लेकिन आज कोरोना वायरस का भयानक मंजर देख पाना मुश्किल।।


-अमित चन्द्रवंशी "सुपा" 

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

वकालत से राजनीति की गलियारों में सुषमा स्वराज जी

वकालत से राजनीति की गलियारों में सुषमा स्वराज जी

सुषमा स्वराज जी का निधन देश के लिए अपूर्ण क्षति है, पक्ष और विपक्ष की भूमिका सादगी से निभाई, भारतीय राजनीति के लिए अपूर्ण क्षति है जिसे हम कभी भर नही सकते। प्रखर वक्ता, महान नेत्री जी का जाना राजनीतिक गलियारों में वेदना का समय है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में वकालत करते, हरियाणा से विधायक 25वर्ष की उम्र में बना, फिर दिल्ली की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनकर, महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश की। भारत की पहली महिला विदेश मंत्री बनी और पूरे विश्व मे भारत की एकता अखंडता का गुणगान किया। लोकसभा और राजसभा सांसद बनकर भारतीय राजनीति में सक्रिय रही, पक्ष और विपक्ष दोनों को भूमिका बखूबी निभाई, हमेशा धैर्य रखने की बात कहती, और विचारों में अमल करते हुए, सादगी से प्रश्न का जवाब देती थी। एक बार इन्होंने यह भी ट्वीट किया था कि यदि आप मंगल में भी फंसे है तो आपका मदद इंडियन एम्बेसी करेगी, सम्पूर्ण जीवन मे सरलतापूर्वक रही। 25 वर्ष की उम्र में कैबिनेट मंत्री हरियाणा के रूप में सेवा देते हुए विदेश मंत्री बने का सफर, विपक्ष में रहते हुए दिलेर इंसान बना, पक्ष में जब एक लोकसभा में भाषण दे रही थी तक आरोप प्रत्यारोप लगे तब सुषमा जी ने साफ कहा अपने साथियों को आप लोग साथ रहे मैं इनसे (विपक्षी) से निपट लुंगी, वास्तव में एक दृण इच्छा शक्ति उनमें थी, साफ राजनीति, सीधी सरल रूप में थी। सुषमा जी का अलग अलग शैली में भाषण हमेशा याद आएगी। यूनाइटेड नेशंस में जलवायु परिवर्तन पर विचार रखी और विदेश नीति में बहुत अच्छा काम किया, सुषमा जी का विदेश निति देखते हुये बनता था, नेपाल में आपदा आई तो सबसे पहले भारत पहुँचा यह सुषमा जी की सादगी थी, इंडोनेशिया की मदद के लिए यूनाइटेड नेशंस में ही बात रखी थी। इस लोक से सुषमा जी का पलायन कर जाना हमेशा खलेगी, नमन है ऐसी मातृ शक्ति को जो हमेशा देश के बारे में सोचती रही।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

शनिवार, 3 अगस्त 2019

दोस्ती की दोस्ताना

दोस्ती की दोस्ताना

उम्र के हर पड़ाव में एक साथी की जरूरत पड़ती है, वह किसी भी रूप में हो सकता है बचपन मे माँ दोस्त का रूप लेती है और खाने से लेकर सब काम करती है। दोस्ती का दूसरा रूप जो उँगली पकड़कर चलना सिखाते है दुनिया से रूबरू कराते है वह पिता होता है, उम्र के हर दहलीज पर कोई न कोई एक इंसान होता है जो दोस्त जैसा होता है और हर उम्र में हर मोड़ में हमारा साथ देते है। बचपन मे दोस्त बहुत होते है जिनके साथ हमारी खट्टी मीठी यादे होती है, बचपन मे साथ बिताये पल वह अनोखी यादे होती है जो जहन में हमेशा होती है, साथ खेलते है, रोते हँसते समय बीत जाता है, बड़े होते है तब वह बचपन याद आता है। समय के सागर में विश्व में हम अलग अलग समय मे अलग अलग विचार वाले लोगो से मिलते है, जीवन मे अनेक अनुभव मिलते है जो सदा सुख के हित में होता है। सात्विक जीवन ऊंच विचार दोस्ती की याद दिलाती है, दोस्ती एक रिश्ता ही तो है जो विश्वास के नींव में टिकी हुई होती है, उम्र जैसे जैसे बढ़ती है हम एक नया अध्याय लिखते है जो विचारों का आदान प्रदान से होती है, समय के साथ विचारों में बदलाव आती है, विचार से रिश्ता मजबूत होता है। एक प्रेमी के लिए प्रेयसी का प्रेम का महत्व होता है वह दोस्त के तरह सादगी से जीवन निर्वाह करता है। एक माता के लिये सन्तान और उसका पति ही दोस्त होता है, जो सुख दुख का साथी होता है। एक पत्नी के लिए उसके पति से अच्छा कोई दोस्त नही हो सकता है, सभी को किसी न किसी उम्र में दोस्त की आवश्यकता होती है वह विभिन्न रूप में मिलते है। एक बेटी किसी की माँ, बहन, पत्नी और पुत्री होती है उसी तरह एक बेटा किसी का पुत्र, पिता, पति और भाई होता है, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए वह जीवन के सभी कर्तव्यों को ध्यान में रखता है और अपना परिचय एक दोस्त के रूप में देता है और दुनिया में अपनी दोस्ती का दोस्ताना सुनाती है। बुजुर्ग होने पर एक पिता व एक माँ का दोस्त बेटा और बहु बन जाते है, यही तो दोस्ती की सार है जो हर हाल में हमे जीना सिखाती है।दोस्त की तुलना हम किसी से नही कर सकते है वह जिस भी हाल में हो हमेशा सुख चाहता रहता है जीवन मे अलग अलग रास्ते से गुजरना पड़ता है सत्य के लिए हमेशा अड़िग होना पड़ता है, सत्य के आधार पर दोस्ती चलती है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
साइंस कॉलेज दुर्ग

बुधवार, 26 जून 2019

पौनी पसारी

पौनी पसारी जाति का महत्व

पौनी पसारी जाति का महत्व छत्तीसगढ़ समाज मे जितना है उतना ही उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, झारखंड,बिहार, राजस्थान तथा महाराष्ट्र में भी है। पहले इनका निर्धारण अक्षय तृतीया जिसदिन गांव बनता है उसी दिन निर्धारित जो जाता था और दान पानी( फसल) मेहनतान कितना देना है सभी का रुपारेखा तय हो जाती थी।  पौनी पसारी जाति देखते देखते आधुनिक जीवन मे बिखर रहे या कहे अब कोई काम करना नही चाहते। ग्वाला,नाई, धोबी, लोहार, मोची, बइगा व कुम्हार आदि पौनी पसारी जाति में आते है इनका महत्व प्राचीन इतिहास में बहुत था आज भी गांव में निहित है।जब भी कुछ होता है गाँव के मुखिया या दाऊ या गांव का गौटिया या जमींदार आदि के घर तब पानी ग्वालिन भरती है और घर का सम्पूर्ण काम करती है, ग्वाला गाय को चराने के लिये लेकर जाता है और दूध दुहता है।मृत्यु हो जाती है किसी का तब घर हिन्दू रीतिरिवाज से अशुद्ध हो जाता है तब ग्वालिन काम करती है।  दीपावली त्यौहार में गोवर्धन पुजा का बहुत महत्व है गोवर्धन के ऊपर चलने के बाद गाय की पूजा की जाती है फिर उसके बाद खिचड़ी खिलाने का कार्य करते है, फिर मोर पंख लगाते हैं ग्वाला 1-2 खाड़ी  में लगता था पहले, अब पैसा भी देना पड़ता है। समय बीत मांग बढ़ रहा है आधुनिक जीवन मे जरूरत पढ़ते जा रही है आज के समय में कुछ पीढ़ी दर पीढ़ी काम करना पसंद नहीं करते हैं सभी लोगों को अपने आसपास बदलाव देखने को मिल रहा है टाइम कम ही देखने को मिल रहा है शहर में नाई बड़ी-बड़ी दुकानों में सलून खोल डाले हैं पहले किसान को खोजते बाड़ी खेत बगीचा जहां भी देखते हैं उनका दाढ़ी और मूंछ बनाते हैं।पूजा हवन आदि के लिए आम की लकड़ी, दूबी फुल पान का जुगाड़ नाई करता था नाई दोना  पतली बनाता था जिसे विवाह में विवाह दशगात्र कार्यक्रम उपयोग में लाया जाता था बदलते समय में यह सब मशीन द्वारा बनता है। धोबी का काम है कपड़े धोने का किसी की मृत्यु हो जाती है तब पूरे घर का कपड़ा धोने की जिम्मेदारी धोबी की होती है और घर का शुद्धिकरण की काम करता है। पहले सुहाग देने की परंपरा थी जिसे धोबी निर्वाह करता था अब यह बंद हो चुकी है। मोची जुता बनाने का काम करता है जूता बनाने का कार्य करता है कोर्रा चमड़ा का समान, बेल्ट ,चप्पल जूता पर्स बनाने का काम करता है। कुम्हार दिवाली त्यौहार में दी और मटका दीपी देने आते हैं अक्षय तृतीया में चुकिया और मटका पानी भर के बगीचे में  और पीपल के पेड़ के नीचे रखे जाते हैं।कुमार के पास बहुत सी कला होती है घोड़ा गाड़ी बच्चे लोगों खेलने के लिए बनाते हैं पुतला पुतली बनाते हैं। लोहार अपने कार्य में महारत हासिल किया हुआ है सभी प्रकार के और बहुत सारे औजार बनाने आते हैं जैसे रापा कहती गैती, सबल आदि पर खेती करने के किस्म किस्म के औजार बनाते हैं लेकिन यह सभी खत्म हो रहे है  जब से जब से ट्रैक्टर हार्वेस्टर आया है तब से खत्म होती जा रही है धंधा चोपट सी हो गई है धीरे-धीरे काम खत्म होते जा रहे हैं बैगा का काम होता है देव देवालय माहमाया में पूजा-पाठ काम करने का जो जवारा जोत जलाने का काम करते हैं आधुनिक आधुनिक शहर में आज यह खत्म हो रहा है। बदलरे वक्त में आज रहते हैं सभी चीजें भूलते जा रहे हैं बदलाव के जीवन में हम अनिरीक्षित बदलते देख रहे हैं मशीन इस दुनिया में सभी चीजों के साथ मुश्किल है आज की पीढ़ी को दिखाने के लिए म्यूजियम बनाने की आवश्यकता है  बदलते वक्त में संस्कृति को संजोकर रखने के लिए अपनी संस्कृति को आधुनिक जीवन में साथ साथ लेकर चलने की जरूरत है समाज को एक दूसरे के साथ जोड़कर रहने की जरूरत है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

शनिवार, 27 अप्रैल 2019

श्रद्धा ज्ञान की जननी है

श्रद्धा ज्ञान की जननी है

आत्मस्वाभिमान से हमें जो कुछ करने की मन मे भौतिक परिवर्तन का अहसास होता है वह जहन में घुल जाता है और मानसिक स्थिति को संतुलन करता है वही श्रद्धा है, इसके मायने अलग अलग स्थिति में अलग अलग है। विभिन्न परिस्थितियां में सकारात्मक सोच के साथ जीवन मे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलता है। मानसिक तनाव से दूर रहकर जीवन मे कर्म पथ में आगे बढ़ना चाहिए।

ज्ञान, चरित्र और संस्कार जीवन का आधार है, कर्तव्यनिष्ठा जीवन मे इंसान को अमरत्व का सीख देती है, समय के साथ ज्ञान के मायने बदलते है, श्रद्धा में वह शक्ति है जो इंसान को गरीब से अमीर तक का सफर तय कराती है। कुछ भी चीजे करते है तो लग्न, निष्ठा का होना बहुत जरूरी है, हमारे आसपास बहुत से उदाहरण है जिनका भाग्य साथ दिया क्योंकि उन्होंने श्रद्धा पूर्वक संघर्ष किया, इंसान को अपनी मानसिक स्थिति  संतुलन बनाये रखना चाहिए।

किसी कार्य को करने के लिये मन मे श्रद्धा हो तब वह इंसान अच्छे और बुरे समय का इंतजार नही करता है वह निकल पड़ता है,रास्ते मंजिल तक बना हुआ नही मिलता है उसे अपने समझ से बनाना पड़ता है, श्रद्धा के साथ संघर्ष होना चाहिए, कोई इंसान ऊंचे मुकाम हासिल करता है उनकी श्रद्धा होती है, आत्मसन्तुष्ट होना बहुत जरूरी है। विचारों का आदान प्रदान आवश्यक है।

एक गरीब की बेटी आईएएस अधिकारी बनती है वह अपनी श्रद्धा भक्ति मेहनत से बनती है, सपना देखी रहती है उसके लिए दिन रात मेहनत करती है, संघर्ष के साथ मानसिक विकास बहुत जरूरी है, आर्थिक स्थिति कितना भी खराब हो, दृण संकल्प इंसान को सफल बनाती है, संघर्ष से सफलता के रास्ते आसान नही होते है समय दर समय रास्ते बदलते रहते है बनते बिगड़ते है, गिरना और उठना लगा रहता है ऐसे समय मे सोच,लग्न और मेहनत ही काम आता है।

श्रद्धा भक्ति इंसान को ज्ञान का मार्ग प्रस्तुत करती है, विषय के ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान, बौद्धिक ज्ञान, संस्कारिक ज्ञान तथा जीवन का ज्ञान का बोध कराती है और सफलता का मूल मंत्र सिखाती है। सफलता सफलता की जान है, जो ज्ञान के मार्ग में चलने से मिलती है मौलिक ज्ञान का होना बहुत आवश्यक है जीवन मे उतार चढ़ाव आता है श्रद्धा ज्ञान की जननी है इसे स्वीकार कर हमेशा सीखने पर जोर देना चाहिए।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

गुरुवार, 14 मार्च 2019

भारत का विरासत ताजमहल

भारत का विरासत ताजमहल

विश्व मे हमारी पहचान विश्व गुरु से है और हमारा देश विविधता और अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता है।हम उस देश के निवासी है जहाँ हमारी पहचान विश्व मे ताजमहल से हुई कहना गलत नही होगा यह भी पहचान का एक हिस्सा है। 2007 में 7अजूबे इस दुनिया के,पहले नंबर पर ताजमहल आया। आजाद भारत की विकास जोरो पर है ऐसे में हमे जो विरासत में मिले वह हमारी देश की उपलब्धी है। शाहजहाँ की रूहानी मोहब्बत मुमताज के साथ रहा और ताजमहल प्यार की निशानी बनी, सच में उनकी मोहब्बत अद्भुत वात्सल्य था।

ताजमहल उत्तरप्रदेश के आगरा जिला में है, जो नई दिल्ली से तकरीबन 250किलोमीटर में है, इसे प्यार का शहर कहा जाए तो खूबसूरती बंया करेगी,प्यार का इतिहास आज का नही सदियों से चली आ रही है वह मुमताज और शाहजहाँ की मोहब्बत हो या श्री कृष्ण और रूखमणी की मोहब्बत। ताजमहल युमना नदी के तट में है, जो मनमोहक दृश्य परिलक्षित करता है, इसका निर्माण सन् 1632- 1653 में हुआ, सफेद संगमरमर का क्षटा बिखेर रही है।

यूनेस्को द्वारा सन् 1983 इसे विश्व की विरासत में शामिल किया गया, हमारी विरासत विश्व की विरासत तक का सफर तय किया। हमारी विरासत ही हमारी संस्कृति का परिचायक है, हमारी संस्कृति की बखान पूरी दुनिया मे तारीफ की गई है। ताजमहल दुनिया में एक अलग तरह का ईमारत में से एक है, हम उस देश का हिस्सा है जहाँ राजाओं ने अपनी प्राण की आहुति दी लेकिन राष्ट्र को मिटने नही दिया और हमारी संस्कृति हमारी विरासत को सहेज कर हमें सौंप कर गये, हमारी संस्कृति हमे विश्व मे अलग पहचान दिलाती है।

ताजमहल का निर्माण जब 1632 में हो रहा था तब न जाने कितने मजदूर की मृत्यु हो गई, उनके खून पसीने के मेहनत से आज ताज विश्व का ताज है। शांति सौहार्दता का प्रतीक आज विधमान है, इसके साक्षी पूरी दुनिया है, अद्भुत है जो हमें जोड़कर रखी हुई है। ताजमहल का निर्देशांक 27°10'30" उत्तर व 78°02'31" पूर्व में में विद्यमान है। वास्तुशैली मुगल का है, यह 17 हेक्टेयर में फैला हुआ है, ताजमहल की ऊँचाई 73 मीटर है। इसका निर्माणकर्ता उस्ताद अहमद लाहौरी है, 1000 हाथी तथा 22000 मजदूर की निशानी है जो उनके संघर्ष और मेहनत से बना, लागत मूल्य 3अरब 20 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हुआ, 28 प्रकार के पत्थर व रत्न श्वेत संगमरमर जड़े हुए है।

19 वी सदी तक आते आते जीर्ण शीर्ण हो गई थी जिसे पुनः सजाया गया। 1857 में आजादी की लौ भारतीय स्वंतत्रता संग्राम की धधक रही थी उस वक़्त सरकारी अधिकारी व अंग्रेज अधिकारी द्वारा ताजमहल में कब्जा किया गया था जिसे अपना आगरा के मुख्य कार्यालय में तब्दील किया गया था। बाद में बागों को ब्रिटिश शैली में बदला गया जो आज भी देखने को मिलता है। भारत सरकार आज ताजमहल की विरासत की मालिकाना हक रखते है, 30से 40 लाख पर्यटक प्रति वर्ष आते है, 2 लाख विदेशी पर्यटक का जमावड़ा प्रति वर्ष रहता है। कारवां बनते गया, ताज वाकिफ में ताज है जो हमेशा की तरह आज भी चमक रहा है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-20वर्ष 'बीएससी अध्ययनरत'
साइंस कॉलेज दुर्ग
दुर्ग, छत्तीसगढ़
मो.-8085686829