श्रद्धा ज्ञान की जननी है
आत्मस्वाभिमान से हमें जो कुछ करने की मन मे भौतिक परिवर्तन का अहसास होता है वह जहन में घुल जाता है और मानसिक स्थिति को संतुलन करता है वही श्रद्धा है, इसके मायने अलग अलग स्थिति में अलग अलग है। विभिन्न परिस्थितियां में सकारात्मक सोच के साथ जीवन मे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलता है। मानसिक तनाव से दूर रहकर जीवन मे कर्म पथ में आगे बढ़ना चाहिए।
ज्ञान, चरित्र और संस्कार जीवन का आधार है, कर्तव्यनिष्ठा जीवन मे इंसान को अमरत्व का सीख देती है, समय के साथ ज्ञान के मायने बदलते है, श्रद्धा में वह शक्ति है जो इंसान को गरीब से अमीर तक का सफर तय कराती है। कुछ भी चीजे करते है तो लग्न, निष्ठा का होना बहुत जरूरी है, हमारे आसपास बहुत से उदाहरण है जिनका भाग्य साथ दिया क्योंकि उन्होंने श्रद्धा पूर्वक संघर्ष किया, इंसान को अपनी मानसिक स्थिति संतुलन बनाये रखना चाहिए।
किसी कार्य को करने के लिये मन मे श्रद्धा हो तब वह इंसान अच्छे और बुरे समय का इंतजार नही करता है वह निकल पड़ता है,रास्ते मंजिल तक बना हुआ नही मिलता है उसे अपने समझ से बनाना पड़ता है, श्रद्धा के साथ संघर्ष होना चाहिए, कोई इंसान ऊंचे मुकाम हासिल करता है उनकी श्रद्धा होती है, आत्मसन्तुष्ट होना बहुत जरूरी है। विचारों का आदान प्रदान आवश्यक है।
एक गरीब की बेटी आईएएस अधिकारी बनती है वह अपनी श्रद्धा भक्ति मेहनत से बनती है, सपना देखी रहती है उसके लिए दिन रात मेहनत करती है, संघर्ष के साथ मानसिक विकास बहुत जरूरी है, आर्थिक स्थिति कितना भी खराब हो, दृण संकल्प इंसान को सफल बनाती है, संघर्ष से सफलता के रास्ते आसान नही होते है समय दर समय रास्ते बदलते रहते है बनते बिगड़ते है, गिरना और उठना लगा रहता है ऐसे समय मे सोच,लग्न और मेहनत ही काम आता है।
श्रद्धा भक्ति इंसान को ज्ञान का मार्ग प्रस्तुत करती है, विषय के ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान, बौद्धिक ज्ञान, संस्कारिक ज्ञान तथा जीवन का ज्ञान का बोध कराती है और सफलता का मूल मंत्र सिखाती है। सफलता सफलता की जान है, जो ज्ञान के मार्ग में चलने से मिलती है मौलिक ज्ञान का होना बहुत आवश्यक है जीवन मे उतार चढ़ाव आता है श्रद्धा ज्ञान की जननी है इसे स्वीकार कर हमेशा सीखने पर जोर देना चाहिए।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
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