बुधवार, 2 दिसंबर 2020
किसान आंदोलन का जड़
शनिवार, 28 नवंबर 2020
भाषायी पुर्नगठन पर छत्तीसगढ़ी
रविवार, 13 सितंबर 2020
हिंदी एक भाषा ही नही परन्तु एक विचार है
गुरुवार, 16 अप्रैल 2020
उदय और अस्त इंसान के हाथ में है
सोमवार, 13 अप्रैल 2020
सुर्खियों के चक्कर मे तैर रही थी लाश : टाइटैनिक
गुरुवार, 12 मार्च 2020
कोरोना से लड़ रहा है विश्व
बुधवार, 9 मई 2018
कश्मीर बदल रहा हैं
कश्मीर बदल रहा है
वो वादी जिसके पूरी दुनिया कायल है धरती में कोई जन्नत है तो वह सिर्फ कश्मीर है। कश्मीर की वादी बहुत मनमोहक है जो सभी को मन को भाँति है, यह भारत का एक ऐसा जगह है जहाँ सभी लोग घूमने जाने के ललायित होते है। धरती का स्वर्ग कहे जाना वाला कश्मीर दिन ब दिन बर्बाद हो रहा है, आखिर बर्बादी का राज क्या है यह सभी जानते है फिर भी मूक बने सब देख रहे है। अलगाववादी, नक्सलवादी तथा आतंकवादी आग की तरह बरप रहे है, सियासत की रोटी सेंकने में मशगूल है सभी आगे आने के नाम पर पीछे भाग रहे है, मसला तो वही है हल कहाँ है? दिन ब दिन हालात बतर हो रहा है, कभी पोलिश पर कभी CRPF के जवान कभी आर्मी ऑफिसर ऊपर पत्थराव हो रहा है लेकिन अब तो हद हो गई पर्यटक भी सुरक्षित नही है, एक ओर जहाँ हम सभी को कोश रहे है उधर दूसरी ओर रातोरात कश्मीर पंडित को खदेड़ दिए। सियासत की आंधी में सब झुलस कर रह गये, मौत के सौदागर आज भी जीवित है, कश्मीर का विलय रियासतों के एक करने में किया गया था जिसे सभी जगह का विकास हो सके लेकिन आज कश्मीर रोती बिलखती नजर आ रही है, मनमोहक वादी श्रीनगर का वह सुंदर दृश्य मन को मोह लेती है।
सत्ता चले जाये लेकिन देश का मान, इज्जत, विकास में बाधा नही आनी चाहिए, रोटी कपड़े और मकान सभी को चाहिए, कश्मीर में भी वही चाहिए लेकिन मौत के सौदागर सियासत की रोटियां सेंकने की काम क्यो कर रही है? आम जनता का हाल जनता तय करेगी सरकार नही, जवान की जो दशा कश्मीर में ही लानत है सियासत की कुर्सी में बैठने वाले पर, दोष देने के बाजये किसी को कोषने के बजाये काम करना चाहिए। अब सत्ता के लालची लोगों को उखड़ फेकने का समय है, वह वक़्त नही रहा की जुल्म होता रहे आवाज न उठाये, वो वक़्त नही रहा की शांत खड़े होकर देखते रहे अब एक्शन का वक़्त है कुछ भी करे तो पलटवार जवाब हमारे एक भाई शहीद होते है तो आतंकवादी और नक्सलवादी के हजार साथी को मार गिराना और बाधक को जड़ से मिटाना चाहिए।
देशभक्त हम एक बात से तय कर लेते है कि देश के साथ कौन कौन खड़ा है तो बात गलत है क्योंकि एक देशद्रोही भी कहता है कि मैं आजादी चाहिए , किस बात की आजादी आपस मे हम सबको लड़ाने के आजादी और देश को जरा जरा में बिखेर देने की आजादी। आजादी का सही मतलब हम आज कहि न कहि भूलते जा रहे है आकांक्षा मिश्रा जी को वो लाइन कानों गूंजता है "इतिहास में इतने रक्त बह चुके है कि अब देश बलिदान नही विकास मांग रही है।" खास ये बात सभी को समझ आ जाये तो देश में ये हाल नही होता और सियासत की रोटी नेता लोग भी न सेंक सके और शांतिपूर्ण तरीके से देश का विकास हो सके।
बुधवार, 23 अगस्त 2017
संस्मरण - वो नन्हे हाथ।
वो नन्हे हाथ..!!
अक्सर देखता हूं खिड़की के बहार तब एक ही चीज दिखाई देता है, वो नन्हे हाथ जो कलम पकड़ते वह कभी झंडा बेच रहा है, कभी किसी ठेले में बर्तन साफ करते नजर आते है; मन मे एक हलचल होता है, खास मेरे पैरों में जान होती और मैं अपने पैरों में खड़ा हो पाता तब कुछ न कुछ उनके लिए करता; आज नही तो कल सही एकदिन जरुरी कुछ करूँगा। दो वक्त का प्यार सभी को चाहिए होता है, प्यार का संचार तभी होगा जब हम अपना खुशी को न देखे दूसरे का मदत करे वास्तव में सच्ची खुशी होती है और जीत का रास्ता दिखाई देता है। एक वक्त की बात है, जब मैं भोरमदेव में शिव मन्दिर दर्शन के लिए गया हुआ था, तब वही एक बच्चे को होटल में काम करते देखा पहले तो मुझे बहुत बुरा लगा फिर मैं होटल मालिक से बोलूंगा सोचा पर मेरा जमीर वहाँ खो गया इस बात को लेकर की अभी पैरो में जान नही उड़ान की सोच रहा हु मैं तो कहता सही पर क्या मैं होटल मालिक की मानसिकता बदल पाता? इसतरह मैं वहाँ से उदास होकर चले गया फिर मुझे मेला में खिलौने लेना था लेकिन उसी वक़्त मैंने निर्णय लिया कि आज के बाद कभी कुछ भी खिलौने नही खरीदूंगा और फ़िजूल खर्चे नही करूँगा जिसे मुझे मायुस होना पड़े और मैं आज कही जाता हूं तो सड़क किनारे उन गरीब आसाहय लोगो को देखते हु मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है लेकिन मुझे उस वक़्त का तलाश है जिस वक्त मैं एक ऊंचे पायदान में चले जाऊंगा तब कुछ न कुछ जरूर करूँगा जिसे किसी के मन मे शांति ला सकू, ये काम नाम के लिए नही पंरतू मानवता के लिए करूँगा। अक्सर सुना करता हु मेरे दादा जी बहुत अच्छे नेक इंसान थे, हमारे गांव के आसपास गांव वाले दादा जी से परिचित थे और दादा जी ने जो कार्य किये वह बहुत सराहनीय था नामी आदमी थे, उनका कार्य सभी के लिए एक था कभी वो अपने आप को बड़ा आदमी नही समझे और उनसे जो कुछ भी बनता था वह मदद करते थे उनके विचार बहुत सुंदर थे मुझे भी याद आते है वह दिन जब मैं छोटा था तब दादा जी ने कहा था , बेटा पटाखे कम जलाया करो, इसे बहुत चीजे का नुकसान होता है, उस वक़्त में 5वी कक्षा में था और मैंने अंतिम बार पटाखे जलाए थे और उनके बातों में अमल किया और मैं हर दीपावली में कुछ पटाखे गरीब बच्चो को देता हूं ताकि मैं नही तो कम से कम वह जला ले और इसी में मैं शांति समझता हूं। नन्हे हाथो में जान तो बहुत होती है लेकिन गरीबी किसी के ऊपर सोच कर नही आती है, कुछ न कुछ उन नन्हे हाथों के लिए करना चाहिए जिसे उन्हें उचित शिक्षा, कपड़े, मकान, तथा भोजन मिल सके, अनाथ कोई नही होते है, समय का चक्रव्यूह ही उन्हें अनाथ बना देता है ऐसे में हमे हीनभाव से न देखे प्यार ,शांति तथा मानवता की नजर से देखना चाहिए, और समय समय पर गरीबो का मदत करना चाहिए।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़
संस्मरण- गंगरेल यात्रा वृतांत
संस्मरण- गंगरेल यात्रा वृतांत.10/08/2k17
कुर्मी अन्नदाता और भूमिपुत्र परिवार का मिलन समारोह गंगरेल में आयोजित हुआ था ,बहुत ने पहले से अपना नाम दिए थे कि हम आयेंगे हम आयेंगे करके और बहुत लोगो ने तो बिना बताये आये थे लेकिन व्यवस्था बहुत सुंदर था। मैं भी कुछ दिन पहले ही सोचा था जाऊंगा करके लेकिन मैं विकट स्थिति में था और एकदिन कतुलबोर्ड गया था घूमने तब डॉ. खिचरिया चाचा का क्लीनिक देखा तब मैं अंदर गया फिर उनसे बात किया और अपना परिचय दिया और उनसे पूछा की आप ही डॉ. खिचरिया चाचा है क्या? फिर उनसे बात हुआ फिर आयोजन के बारे में भी बात हुआ फिर हम लोगो को अपने घर ले गए थे बाड़ी भी देखे जिसमे अंजीर का पेड़ था जिसमे फल लगे हुए थे फिर घर अंदर गए एक माजा का डिब्बा पीने के लिए दिए जिसमे तोड़ा ही था तो चाचा बोले लड़ना मत पीलो आगे खरीद लेंगे, फिर चाचा ने रूम तक हम लोगो को कार से छोड़े। कुछ दिनो बाद पता चला प्रोग्राम का तिथि तब चाचा ने कहा कि नाम जोड़ना मत सबको आश्चर्य करना है फिर वह दिन 10अगस्त आ गया जिसका सभी को इंतजार था होता भी क्यो नही किसी अपने से मिलने में जो आनंद होता है वह कही और नही होता है, सुबह चाचा फोन किये की बेटा रायपुर नाका तक आ जाना वही हम लोग मिलेंगे फिर मैं वही स्टॉप में बैठा था मेरे बगल में थोड़े देर बाद सूरज बड़ी मम्मी आई और बैठी थी, मुझे पता नही था कि हम साथ जायेंगे क्योकि मैं सूरज बड़ी मम्मी से कभी मिला नही था फिर जब सत्यदेव चाचा नाका के पास आये तब चन्द्रा चाची बुलाई कि बेटा अंदर आ जाओ फिर सत्यदेव चाचा, राकेश चाचा, चन्द्रा चाची, सूरज बड़ी मम्मी और मैं कार में बैठे थे फिर आगे की मंजिल की ओर रुख किये तब सत्यदेव चाचा हँसते है और बोले कि दोनों अगल बगल में बैठे थे फिर भी बात नही किये, हम सभी लोगो को हँसी आ गई। आर्टिग कार में जा रहे थे तभी बीच मे सुरज बड़ी मम्मी ने बड़ा बना के रखी थी सब लोगो मे थोड़ा थोड़ा खाये फिर थोड़े देर में चाची हाथ मे चश्मा पकड़ी थी वो टूट गया फिर गुंडरदेही में चश्मा दूकान गए वहाँ उनका चश्मा नही बना उतने में गाड़ी खड़ी थी तो सूरज बड़ी मम्मी केला खरीद ली फिर हम लोग आगे निकले फिर थोड़े दूर गए थे उतने में दूसरे कार वाले ने हम लोगो को कुछ बोला लेकिन हम लोगो ने ध्यान नही दिया कांच बन्द था सुनाई नही दिया फिर दुबारा फिर बोले तब जान पहचान के होंगे करके बोली सूरज बड़ी मम्मी तब रुके तब उन्होंने जो बताये की पीछे का टायर पंचर हो गया है फिर सभी लोग उतरे फिर देखे कि हम लोगों ने तो थोड़ा दूर पंचर गाड़ी में सफर किये फिर चक्का बदले मैने भी थोड़ा मदत किया राकेश चाचा तो पूरा पसीने में डूब गए थे फिर हम लोग आगे की सफर तय किये और गुंडरदेही से धमतरी रास्ते मे एक अम्मा का होटल है जहाँ का बड़ा बहुत प्रसिद्ध है, वहाँ का बड़ा सत्यदेव चाचा लाये फिर हम सभी ने खाये फिर डॉ. चन्द्रा खिचरिया चाची काजू कतली मिठाई रखी थी खाने के लिए दी। गाड़ी चली अपने रफ्तार में हम लोग आखिरकार गंगरेल पहुच गये फिर रेस्ट हाउस में पता किये कोई नही थे फिर फोन काल किये किसी का फोन नही लग रहा था फिर रेस्ट हाउस के रसोईघर में कुछ लोग काम कर रहे थे, उनसे जाकर सुरज बड़ी मम्मी ने पूछी की ये बैस जी ने ही किराये से लिया है क्या करके? तब पता चला बाकी सभी लोग घूमने गए है फिर हम लोग सभी लोगो को ढूढ़ने लगे इसी दरम्यान सत्यदेव चाचा के साथ हम लोग बांध में रास्ते बने है और डैम के दूसरे ओर गार्डन के ओर जाता है उधर गए पर पता चला वहाँ कोई नही थे फिर हम लोग वापस आये फिर एक फोटोग्राफर से पूछे कि बहुत सारे लोग झुंड में है देखे है क्या फिर वो बताये पास में ही एक मन्दिर है वहाँ गए होंगे लेकिन वहाँ कोई नही थे सिर्फ वहाँ खिल्लु भैया और दीनू चाचा मिले फिर मन्दिर घूमे फिर वहां से वापस आये नया रिसोर्ट बन रहा है उसे बहार से ही देखे फिर वहां से वापस रेस्टहाउस आये फिर कुछ लोग मिले फिर तोड़े देर बाद सभी लोग आते गये घूम फिर के आ रहे थे सभी लोगो ने बहुत मस्ती किये थे। फिर धीरे धीरे सभी लोग मिलते गए छत्रपाल चाचा, भगवती बड़ी मम्मी, ममता बुआ, ज्योति बुआ, गोविंद चाचा, हेमंत भैया, तारेंद्र चाचा और एक नयाब चाचा का नाम ही भूल गया था मनीष चाचा जी फिर गोविंद चाचा ने बहुत लोगो को अंडा पिलाये फिर सभी लोगो ने खाना खाये फिर हाल में बैठे फिर परिचय सत्र चला जिसमे भूमि पुत्र और कुर्मी अन्नदाता दोनों के सदस्य थे लेकिन बहुलता भूमिपुत्र की ज्यादे थे जिन लोगो का विचार अनुकरणीय था सत्यदेव चाचा का लगभग 150रिसर्चर पेपर निकल चुका है और एक कल्याण कॉलेज की प्रोफेसर आंटी जी का लगभग 60 रिसर्चर पेपर और सुधा वर्मा बड़ी मम्मी का 7पुस्तक प्रकाशित हो चुका है और देशबन्धु की मड़ई अंक की सम्पादिका है उनका ख़ुद का कॉलम पेपर में रहता है। बहुत लोग थे जिनका विचार एक मकसद एक दिशा तय करने के लिए था जो मेरे लिए सकारात्मक साबित होता है और मुझे प्रकृति में समय व्यतीत करना अच्छा लगता है इसलिए गंगरेल डैम भी बहुत मनोरम लगा फिर सुरज ढलने लगी शाम होने लगी और सभी लोग धीरे धीरे अपनी अपनी जगह स्थान कि ओर अग्रसर होने लगे।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़
सोमवार, 10 अक्टूबर 2016
सत्य की जीत
"सत्य के पथ पर कोई अपना नही होता है ; सत्य हमेशा जीवन का लाज रखता हैं।"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
असत्य पर सत्य की जीत दशहरा पर्व की हार्दिक बधाईयाँ!!
'त्याग जीवन का मुलमंत्र हैं , त्याग की भावना जीवन जीने का पुरुषर्था का गुणगान करता हैं ; नैतिकता लाभप्रद होता हैं , सत्य हमेशा विजयी होता हैं।'
"अमित सत्य सत्य अमित एक नाम हैं,
जीवन में हमेशा सत्य की पहचान हैं ।"
जीत की कल्पना करने से बेहतर है कि आप कोशिश कीजिये और एक लक्ष्य तक अपना कार्य को अंजाम दे। सत्य आपके साथ हैं , तब आप डूबते हुए जहाज को भी बचा सकते हैं। घमण्ड इंसान को ले डुबता हैं और कही का नही छोड़ता हैं ; घमण्ड , दो उड़ते जहाज में एक-एक पैर रखने जैसा हैं तथा अहंकार इंसान को अधमरा करके छोड़ता हैं , घमण्ड का विनाश निश्चित हैं।
असत्य पर चलने वालो का हार निश्चित हैं क्योकि असत्य खराब पानी जहाज की तरह हैं जो कभी भी पानी में डुब सकता हैं और साथ में दुसरों को भी डुबो देता हैं। कभी भी जीतना हैं तो सत्य के साथ अपना रुख की दिशा नवीन कार्य कि ओर मोड़ ले तथा संघर्ष का विराम नही होने दे।
सत्य का बोध हमे स्वयं करना होता हैं , सत्य जलते हुए दीप की तरह हैं जो कभी भी अंधेरा नही होने देता हैं ; सत्य जीवन को फुलों की तरह से सुन्दर उपवन का निर्माण करता हैं जो हमेशा सुन्दर सुगन्धों से इंसान को महका देता हैं।
क्रोध, लोभ , पाप तथा हिंशा से कोषो दूर रहे तथा हमेशा जीवन में एक अच्छे कर्म अहिंशा से कीजिये जो आपका इतिहास बनेगा और आप इस उगते हुए दुनिया में अमर हो जायेंगे। सत्य को साथ हमेशा मिलता हैं और सच्चाई की जीत अंतिम घड़ी तक होता हैं।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015
Happy Birthday Mom
Dearest mom...Wish you many many returns of the day....May all your dream come true.....God bless you mom.....Love u mom......