सोमवार, 28 नवंबर 2016

1.Come back soon....

Come back soon....

-Amit Chandravanshi "Supa"

You will earne for me
I belong someone else
I can't live without yoy
Love scares you
Go away....

I will take you to back your love
Why you didn't agree?
Love is everyday sweet
Why you couldn't impress me?
Life is give one chance....

Love's in front you
You will become my love
I won saw to you
I didn't live without you
Can u teach me what's love?

I didn't live without you
You do need something
I give some excellent love
You dont believe me either
Go away....

-Amit Chandravanshi "Supa"
Age-17 Years old 28 Nov 2016
9:25PM From- Kawardha, Chhattisgarh Mo.-8085686829

सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

सत्य की जीत

"सत्य के पथ पर कोई अपना नही होता है ; सत्य हमेशा जीवन का लाज रखता हैं।"

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

असत्य पर सत्य की जीत दशहरा पर्व की हार्दिक बधाईयाँ!!

'त्याग जीवन का मुलमंत्र हैं , त्याग की भावना जीवन जीने का पुरुषर्था का गुणगान करता हैं ; नैतिकता लाभप्रद होता हैं , सत्य हमेशा विजयी होता हैं।'

"अमित सत्य सत्य अमित एक नाम हैं,
जीवन  में हमेशा सत्य की पहचान हैं ।"

जीत की कल्पना करने से बेहतर है कि आप कोशिश कीजिये और एक लक्ष्य तक अपना कार्य को अंजाम दे। सत्य आपके साथ हैं ,  तब आप डूबते हुए जहाज को भी बचा सकते हैं। घमण्ड इंसान को ले डुबता हैं और कही का नही छोड़ता हैं ; घमण्ड , दो उड़ते जहाज में एक-एक पैर रखने जैसा हैं तथा अहंकार इंसान को अधमरा करके छोड़ता हैं , घमण्ड का विनाश निश्चित हैं।

असत्य पर चलने वालो का हार निश्चित हैं क्योकि असत्य खराब पानी जहाज की तरह हैं जो कभी भी पानी में डुब सकता हैं और साथ में दुसरों को भी डुबो देता हैं। कभी भी जीतना हैं तो सत्य के साथ अपना रुख की दिशा नवीन कार्य कि ओर मोड़ ले तथा संघर्ष का विराम नही होने दे।

सत्य का बोध हमे स्वयं करना होता हैं , सत्य  जलते हुए दीप की तरह हैं जो कभी भी अंधेरा नही होने देता हैं ;  सत्य जीवन को फुलों की तरह से सुन्दर उपवन का निर्माण करता हैं जो हमेशा सुन्दर सुगन्धों से इंसान को महका देता हैं।

क्रोध, लोभ , पाप तथा हिंशा से कोषो दूर रहे तथा हमेशा जीवन में एक अच्छे कर्म अहिंशा से कीजिये जो आपका इतिहास बनेगा और आप इस उगते हुए दुनिया में अमर हो जायेंगे। सत्य को साथ हमेशा मिलता हैं और सच्चाई की जीत अंतिम घड़ी तक होता हैं।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

चाइना समान का बहिष्कार एक मात्र रास्ता हैं

देश के खातिर एक पहल और एक सोच छोटे भाई अमित चन्द्रवंशी"सुपा" भाई के साथ।

जोर शोर  सभी दिशा में छाये हुए है कि चीनी समान का उपयोग न करे। उस वक़्त कहा थे? जब किसान आत्महत्या कर रहे थे और आप कोकोकोला , पेपसी पीते रहते थे ; विदेशी शराब पुरे भारत में बिकता है , क्या अब शराब पीना छोड़ देंगे न ? नही छोड़ सकते हैं , कहाँ गई आपकी इंसानियत ? कल तक सिर्फ किसान मरते थे, आज तो सरहद में सेना पर पहाड़ टुटने वाला हैं; फिर भी आप शराब पीना नही छोड़ सकते हैं। प्रश्न छोटा है पर मानवता पर कटक्षवार करता हैं।

'विदेशी समानों के बेगार तो जिन्दगी मुमकिन नही हैं।' बोलने वाले गौर कीजिएगा ; पहले भी लोग जीते थे बेगर विदेशी समानों के , फिर आप क्यों नही? स्वदेशी अपनाए और भारत का बेहतर कल बनाये; आज चाइना और दुसरे देश इसलिए सक्षम है क्योकि वे अच्छे इंजीनियर , वैज्ञानिक और  डिज़ाइनर आदि को उचित दाम में जॉब में रखते हैं और वे सब पुनः भारत में आने का सोचते नही हैं,'भारत में योग्यता के अनुसार जॉब और इनकम नही मिलती हैं।' जिससे भारतीय मुल्क़ के लोग विदेशों में जाकर बसने लगे हैं; देश कि तरक्की तो विदेशो में हैं  फिर देश में तरक्की कहाँ से आयेगी?

छोटी छोटी बाते पर गौर कीजिए;आज वह समय है ,जहाँ पुरे देश में नशीली पदार्थो पर रोक लगा दीजिए ताकि देश के बेहतर कल सड़क चौराहो में न कुचले जाये। स्वयं बदलिए , आज  समझोता करने का वक़्त नही है सिर्फ एक्शन लेने का वक़्त हैं। सभी विदेशी समानों का बहिष्कार कीजिए; नेलकटर ,विदेशी शराबो, सुईयां, विदेशी गाड़ी , इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और पटाखे इत्यादि विदेशी चीजों का भारत में बहिष्कार कीजिए। एक नया बदलाव आयेगा और भारत में हूनर की कमी नही हैं, धीरे धीरे सभी चीजें बनाना सीख जायेंगे।

"आज जंग में जायेंगे 10साल पीछे चले जायेंगे,
कुछ  नही होगा फिर  नक्शा बदल जायेगा।
भारतीयो साथ साथ आगे बढ़ते चले जाओ,
आखिर वक़्त हैं चाइना समान टिकता नही हैं।"

अभी चाइना समानों पर रोक लगा दीजिए तथा धीरे धीरे सभी समानों पर रोक लगा दीजिए ताकि बेहतर कल की कलपना किया जा सके। देश से बड़ा कुछ नही हैं , आखिर अब किसान और जवान शहीद नही होंगे; वक़्त के साथ देश के लिए खड़ा होना सीखे, एक सोच एक पहल देश बदल सकता हैं। चाइना समान और विदेशी समानों का उपयोग न करे।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

मंगलवार, 27 सितंबर 2016

कैसा हैं छत्तीसगढ़

वास्तविकता दर्दभरी छत्तीसगढ़ की कहानी अमित चन्द्रवंशी"सुपा" के कलम से....

क्या था छत्तीसगढ़ और कैसा था छत्तीसगढ़?
आज का छत्तीसगढ़ वेदना से भरी पड़ी हैं, दिल  रुबरु हो जाता हैं और आँख नम हो जाता हैं जब  भ्रष्टाचार को देखता हूँ। जड़ से लेकर फल तक पुरे एक ही शिकंज के रुबरु है।वेदना भरी निगाहें से छत्तीसगढ़ डूबी हुई हैं। एक समय था, जब छत्तीसगढ़ में '36 किले' थे महानदी के दक्षिणी हिस्से में 18किले और उत्तरी हिस्से में 18किले थे; वास्तव में ये आज भी हैं पर अपना नाम दुनिया में क्या भारत में भी प्रसिद्ध नही कर पा रहे हैं।'भोरमदेव' छत्तीसगढ़ का खुजराहों के लिए प्रसिद्ध हैं, 'राजिम' में त्रिवेणी संगम हुआ हैं, माता बमलेश्वरी 'डोंगरगढ़' के पहाड़ में विराजमान हैं तथा हीरे की खान के लिए प्रसिद्ध है 'देवभोग'।

बस्तर की संस्कृति सदियों पुरानी है; आज भी वहाँ आदिवाशियो का झुण्ड रहता हैं, आदिवाशियो के लिए जो भी नेक कार्य करने का सोचते है और वह जैसे ही आगे बढ़ते हैं; उनको बम से बीच रास्ते में उड़ा दिया जाता हैं, उसका एक अंश देखने को मिलता हैं; 'बस्तर टाइगर' के नाम से प्रसिद्ध शहीद मेहन्द्र कर्मा सर जिन्हें दरभा घाटी में कांग्रेस के काफिला में बेरहमी से मर डाले थे,किसी को नही छोड़े थे। दर्दनाक भरी कहानी इस छत्तीसगढ़ का वर्तमान स्वरूप से परलक्षित होता हैं; इस धरती का सबसे सुन्दर जगहों में से एक जगह हैं 'बस्तर की वादी', वहाँ आज नक्सलिओं का ढेरा बना हुआ हैं, बस्तर एरिया की भविष्य सरकार के मुख में तमाचा मर रहे हैं; वहाँ के लोगो का हाल बेहाल हो गया हैं, न तो सुख साथ हैं न मुश्कान चहरे पर आती हैं ,जब जब वे लोग अपने मौहोल को देखते हैं तब उनके आँखे नम हो जाते हैं।

छत्तीसगढ़ की स्थिति सोचनीय हैं; एक समय था जब अंग्रेजो का शासन था तब धुप भरे बादल के नीचे मजदुरों की तरह खुद के खेतों में काम करते थे लोग और आज भी यही हो रहा हैं अकाल का सामना करना पड़ता हैं; ऊपर से मुहावज भी नही मिलता है , अंत में परिणाम आता हैं खुदखुशी का। कुछ चारा नही होता है और आजकल के सरकार में भी दम नही है कि किसानों के हित में कार्य करे; किसानों का सुनने वाले कोई नही हैं।छत्तीसगढ़ में आय दिन किसान खुदखुशी करते है; छत्तीसगढ़ की वेदना बड़ी सक्रमक हो गया हैं और यहाँ आय दिन भ्रष्टाचार बढ़ती जा रहा हैं। भिन्नता से भरी हुई हैं ,छत्तीसगढ़ की मार्मिक स्थिति वेदना से परिपुण हैं; आज बाबर्ता से कम नही है छत्तीसगढ़ का हाल, जहाँ स्कूल जाने के लिए जिंदगी दांव में लगी होती हैं और सड़क में चलना दुभर हो गया हैं।

न तो स्त्री सुरक्षित महसुस करती है न तो आम आदमी, कभी एसिड अटैक से सामना करना पड़ता है तो कभी बीच चौराहे पर कुचलाते हुए। छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक छुआछुत हैं,  यहाँ आज भी लोग पुरानी परम्परा को मानते है जिससे आय दिन समाज में युद्ध छिड़ा हुआ रहता हैं।आज रास्ते में जिंदगी दाव पे लगी हैं, ट्रक वाले मस्त मगन से स्पीड में ट्रक दौड़ते हैं,उन्हें अपनी पड़ी रहती है और बीच रास्ते में कुचल दे रहे हैं।छत्तीसगढ़ में 90% दुर्घटना शराब पीकर गाड़ी चलते है उनके साथ ही होता है और अच्छे लोग दुर्घटना का शिकार बनते हैं। नशापान छोटे उम्र के बच्चे भी करने लगे हैं; छत्तीसगढ़ की आधी से अधिक जनता नशे में डूबे हुए हैं। इसका अंत भी नही हो रहा हैं, सरकार चुपी साधे बैठे हुए हैं और ऊपर से जो नेक कार्य करते है उनके ऊपर धारा लगाकर जेल भेज देते हैं; यहाँ की सरकार तो पैसे की लालच में डूबा हुआ है, भविष्य तो दिख नही रहा है और ऊपर से शिक्षा में घोटाला तथा नौकरी भी आउटसोर्सिंग के माध्यम से दूसरे राज्य के लोगो को दे रहे हैं फिर क्या छत्तीसगढ़ के पढ़े लिखे लोग आज बेरोजगार घुम रहे हैं; योग्यता है लेकिन उसके अनुसार काम नही मिल रहा हैं इस सबका जिम्मेवार छत्तीसगढ़ की सरकार हैं।

छत्तीसगढ़ की वेदना एक माँ की कहानी सी है कैसे एक माँ अपने बच्चे के लिए रोती हैं? वैसे ही छत्तीसगढ़ की भुमि हो गया हैं। यहाँ तो आये दिन दुःख का सामना करना पड़ता हैं; जिंदगी उलझ गया हैं।छत्तीसगढ़ की वेदना सरलता से मिट नही सकता हैं, भ्रष्टाचार पुरी जड़ से जकड़ा हुआ हैं जिन्हें पानी देने के लिए बहुत लोग हैं।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

वर्तमान स्थिति के परिपेक्ष्य

मेरा एक सोच अमित चन्द्रवंशी"सुपा" वर्तमान स्थिति के परिपेक्ष्य।

कभी कभी सोचता हूँ?
हमारे हाल का जीमेवार कौन हैं? ये सोचते सोचते आँखे नम्  हो जाता हैं। हमारा नैतिकता किस रूट में पड़ी हुई हैं ये सोचते सोचते मन अंधकार के सागर में गोता लगाने लगता हैं; आखिर कब तक नैतिकता के साथ खिलवाड़ करते हुए नजर आयेंगे और कब तक मानवता शर्मसार करते हुए रहेंगे? शब्द छोटा है पर सोचने के लिए हिम्मत चाहिए! कब तक रोते हुए नजर आयेंगे? मंदिर के किनारे ,सड़क के किनारे, बीच सड़क के चौराहों पर आखिर कब तक भारत कि निर्धन गरीब नजर आयेंगे? उनके इंसाफ के लिये आवाज कब उठेगा? यहाँ तो हिन्दू-मुस्लिम , आमिर-गरीब बाँटते फिर रहे है फिर कैसे सोचे कि कोई निर्धन के इंसाफ के लिए खड़ा हो?

                     "डुबता हुआ चाँद, उगता हुआ सुरज" संजोग  दोनों कभी मिल नही सकते हैं; उसी तरह क्या आमिर-गरीब कभी मिल नही सकते क्या? आर्थिक प्रोब्लेम भविष्य के साथ खड़ा होता हैं, आखिर विकसित देश में नाम चाहिए तो गरीब को भी साथ लेकर चलना होगा अन्यथा हमारा देश हमेशा विकासशील ही रहेगा विकसित नही हो सकता! आपका एक सोच देश का भविष्य बदल सकता हैं, एक पहल तथा एक कार्य देश का इतिहास बदल सकता हैं।

             इंसान का दुःख इंसान ही समझता है, नही तो आज हमें जो आजदी मिली है वह नही मिला होता तो हम आज भी  अँग्रेजो के गुलाम होते और पड़े होते किसी कोने में नौकर की तरह। कभी सोचा कीजिए आप कैसे रहते है? और हमारे देश का भविष्य अर्थात् किसान , मजदुर तथा नौकर कैसे रहते हैं? हमेशा देश के हित के लिए सोचते हैं और कभी भी अपने लिए परन्तु दुसरे के लिए अन्न बोते हैं तथा मजदुर दुनिया के चमत्कार के लिए हमेशा कुछ नया ही करते हैं, "सात अजुबा प्रस्तुत है उदाहरण के लिए जैसे ताजमहल,चीन की दीवार,द ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गीज़ा ,स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, चेचेन इटजा पिरामिड, कोलोसियम और रोमन कोलिसियम तथा माचू पिकचु(8000फिट) अबोव सी लेवल।"

                       आखिर इतना सब कुछ तो कर दिए फिर भी इन्हें सम्मान क्यों नही  देते हैं? आपने तो सिर्फ देखे है पर वे तो पुरा कर्म करके आज भविष्य के साथ देश को खड़ा किया हैं; वे नही होते तो कुछ भी नही होता, आप आज जहाँ है वहाँ नही होते; फिर कभी सोचे हो अन्न को आप कैसे फेक देते हैं? अकाल पड़ता है तब किसान सिर्फ आपके लिए कदम उठाता हैं, उसे पुनः गरीबी से सामना करना पड़ेगा और वह अनाज नही दे पाया जिन्हें उनका चाह था नही तो ऐसी अपने आप से खुदखुशी नही करते।

बुधवार, 14 सितंबर 2016

Engineering

Engineers to strengthen the structure of the country.  mechanic,civil ,CS and Aircraft engineer, field of God In the earth. Always his modernity. In the area of other cs are targeting. with All confidence and consult are like space and exceed beyond others in conflicts. Its honest for every engineer as like life is bright. wish you happy engineering day to all my dearest friend....

Regarding
Amit Chandravanshi"Supa"

मंगलवार, 13 सितंबर 2016

नैतिकता का पाठ

अमित चन्द्रवंशी"सुपा" भाई के कलम से नैतिकता का पाठ जो जीवन के अमरत्व स जी रहा हैं।

कहा गया हमारा शिष्ठाचार , परंपरा , शिक्षा , नैतिकता तथा कर्म इत्यादि विलुप्त होते नजर  आ रहे हैं। आज कर्म करने का सोच एक जुनून भरी कहानी बन गया हैं, कहते बहुत लोग है पर करने के समय पीछे हट जाते हैं। सभ्यता के अनुरूप चलते है पर ये कैसे भुल गए कि  आदिकाल में कोई जीव का हत्या नही करते थे  फिर आज कैसे? ये हमारी सभ्यता हैं कुछ भी हो जश्न के रूप में माँस मछली बनता है , कहाँ गई मानवता ? अपने आपको मानव कहलाने वाले कभी सोचे हो आप मानव तो दूर आज राक्षस भी कहलाने में शर्म आएगा क्योकि राक्षस भी ऐसा कर्म नही करता था। एक जमाना था जब शीतलता( बरगद वृक्ष के नीचे) में योग , शिक्षा, ज्ञान , व्यायाम तथा सोते थे ,  प्रदूषण का कोई तनाव दिल में नही होता था ये हमारी विशिष्ट नैतिकता था।

उम्मीद से सभी जगह जीने का आस रहता था पर आज जीये भी तो कैसे दिन-ब-दिन प्रदूषण बढ़ते जा रहा है हमारी सभ्यता पुरी तरह लुप्त होते जा रहा है घोडा गाड़ी के जगह चरपहिया वाहन दतुन के जगह ब्रश और गुरुकुल के जगह स्कूल होगया हैं अब नैतिकता की बात आता हैं  तब  अनेकता में एकता की बात आता हैं जो छोटी सी शब्द है  पर दिल को सभी के लिए एक समान व्यवहार के लिए प्रेरित करता हैं।"संस्कार, व्यवहार ,एकता ,ज्ञान, चरित्र  और शील इत्यादि नैतिक का मूल तत्व है" जो सभी को अनुठा रिश्ता में बांधता हैं। इसके साथ जीवन में नैतिकता का पाठ हमेशा सत्य के राह पर चलते हैं। "जो जैसा करेगा वैसा भरेगा" कर्म ही हमारा नैतिक विचार उत्पन्न  करता हैं तथा हमारा नैतिकता यही रहता है कि हम सदैव देश की सम्मान, जरूरतों की सेवा, प्रेम की सम्मान, मदद करना,हक दिलाना, जाति में विविधता न समझना, उच्च नीच का भेद नही, संस्कार, शिक्षा इत्यादि।
जय जवान जय किसान

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"