मंगलवार, 23 अगस्त 2016

सारन्स

सारंस छत्तीसगढ़ी म अमित चन्द्रवंशी"सुपा" संग

पेपे ह एक ठन सहर म पढ़े बर आइच ओखर 12वी खत्म होगीच तहले ओह कुछ दिन सुरताइच तहले ओला एकोठन सुघ्घर आसन कालेज नई मिलीच त हो ह थोड़किन समय बाद पढ़े अऊ गढ़े बर कोचिंग पढ़ेला धारिच थोड़किन थोड़किन क्लास जायला धरिच तहले ओ ह संगी बनाईच अऊ ओखर संग घुमे ला धारिच तह ले ओखर भेट एक मनखे संग होगीच लेकिन ओखर बोले के तमीज बड़ा बेसुरा बतमिज किस्म के रहिच होकर संगी मन धीरे धीरे पढ़े लगीच तहले  एक दिन फेरे ओखर संगी बनीच पर ओखर व्यवहार ह बहुत घटिया हवय ख़ुद सबसन लड़ते अऊ कह दीच एक सुघ्घर टुरा ल की अहिच लड़वाये हवय बिचारा के कुछु गलती नही ह तभो ओला कह दिच लेकिन बेचारा बुरा नही मनीच मन के अबड़ सुघ्घर हवय धीरे धीरे क्लास खत्म होत रहिच सबके घर जाये के दिन आ गे सब झन चल दी एक दिन कौनो नई रुकय कोखरबर संगी बनानव लेकिन अपन स्वार्थ बर ओखर दिल ल मत घसिटव तेह करम करबे त तोला कुछु मिलहि ओला कुछु नई मिलय जीवन म तेह आगु बड़बे कबर कि सीढ़ी तेह चड़बे  तभे तोला बादर में उड़ाबे अऊ कहिबे जमीन ले सीधा बादर म उड़हु त गिर जबे तेह ओती के रहबे न ऐति के ।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
   छत्तीसगढ़ी सारंस

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