बुधवार, 31 अगस्त 2016

मानव जीवन पर कटाक्षवार

मानव जीवन पर कटाक्षवार अमित चन्द्रवंशी"सुपा" के कलम से...

अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता बहुत सुहानी हैं। एक समय था जब हिन्द सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था लेकिन वास्तव में अब दूर दूर तक नही हैं। भिन्नता में एकता खोता जा रहा है हिन्द की विशेषता कहि लुप्त होते जा रहा हैं फिर भी अनेकता में एकता के लिए महसुर भारत आगे चलकर विभिन्नता से परिपुड़ होने के कगार में हैं। संघर्ष में विराम नही हैं जहाँ पहले लड़कियो को चुल्हा चौकी से निकलने नही देते थे आज वही बेटी भारत का नाम सुमेर रही हैं सैनिक बॉडर खेल आईएएस आदि में अपना नाम पहले प्यादन में ला रही हैं फिर भी आज हमारा देश एकता से भिन्नता की ओर रुख कर रहा हैं जहाँ की संस्कृति में युद्ध के लिए अहेलिया रानी लक्ष्मी आई
वहाँ आज एक बेटी के बीच चौराहे पर इज्जत के साथ खिलवाड़ कर दिया जाता हैं वहाँ पे तमाशा देखने वाले बहुत हो जाते हैं 2को गिराने के लिए 20-30 लोग में एक भी आगे नही आते हैं कहाँ गई एकता? कहाँ हैं आपका मर्यादा? संघठन में शक्ति हैं मात्र नाम के लिए हो गया एक भी कंधा नही उठा "दाना मांजी" की पत्नी के लिए और तो और अपने देश की सरकार से मदत नही मिला "दूसरे देश के राष्ट्रपति ने हाथ बढ़ाया हैं" अहिंशा का पाठ पढ़ने वाले कहा थे उस समय जब इंसाफ के लिए "दामनी और निर्भया" जिंदगी और मौत से झुँझ रही थीं इंसाफ मे आवाज कहा सुने  इंसाफ कहाँ था ? नबालिक घोषित कर दिया। अंजाम बहुत बुरा हुआ हैं फिर भिन्नता में एकता कहाँ से लाये यहाँ तो इंसानियत किसी कोने में पड़ी नजर आ रहा हैं अखण्डता में एकता हिन्द की विशेषता सिर्फ नारा बन गया हैं। जब जब देश में काली घटा छाई हैं तब तब कोई न कोई इंसाफ दिलाये हैं फिर कहाँ थे जब ये सब कार्य हो रहा था क्यों चुपी साधे बैठे थे?

जय हिन्द जय छत्तीसगढ़

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

शनिवार, 27 अगस्त 2016

2.कहानी

छत्तीसगढ़ी कहानी अमित चन्द्रवंशी"सुपा" के संग

एक ठन गाँव म डोकरा डोकरी नदी के पार म झोपडी म रहत रहिच दुनु झन अब्बड़ मया करय ओमन ह राजा के बेटा ल डुबत रहिच त बचाये रहिच त एक दिन उमन ल ओ एरिया के राजा ह राज दरबार म भुलाइच डोकरा डोकरी सोच म पड़ गे हमन कुछु नई करेंहन  तभो हमन ल कबर राजा ह भुलाय हवय हीरू हीरू दूनो झन राज दरबार बर निकलीच अऊ ओमन ह रद्द ल भटक  के जंगल कोती चल दिच आगे जात गेइच त ओमन ल एक झोपड़ी दिकीच ओ झोपडी म 4 - 5 ठन सांप मरे दिकिच तहले ओमन गाँव जबो काईके रद्द ढूढ़े धरिच अब्बड़ प्रयास करिच नई मिलच त ओमन सोचिच अब तो अहि जंगल म रहना हवय तहले ओमन ह एक ठन झोपड़ी बना लिच धीरे धीरे अब्बड़ दिन हो गिच राजा डोकरा से मिले बर तरसे ल धर लिच तह ले राजा ह सैनिक मन ल डोकरा डोकरी ल खोजे बर सब राज्य में भेज दिच अब मिलबे नई करिच तह ले जंगल मन में भेजेला धरिच खोजत खोजत सैनिक थक गेइच तब जाकर मिले वतकेच बेरा डोकरा डोकरी शरीर त्याग दिच जब राजा के पास समाचार पहुचिच कि डोकरा डोकरी ह ओखर माँ बाप ए तब राजा के एक झन सैनिक आके ओला दुखी समाचार सुनाइच की डोकरा डोकरी इ दुनिया म नई रहिच त राजा अब्बड़ दुःखी होइच काबर की ओमन कोई अऊ नहि राजा के माँ बाप थे जेन ल राजा अपन स्वर्थ भर ओमन ल छोड़ दे रहिच।

"अपन स्वर्थ भर कखरो जिंदगी ले मत खेल जब अपन संग होथे त पता चलते स्वर्थ से इंसान इंसानियत भूल ज थे।"

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

1.कहानी

1.कहानी अमित चन्द्रवंशी"सुपा" के हस्तलेखन प्रस्तुति

"बचने की उम्मीद नही हैं फिर भी अंतिम घडी तक  सत्य के साथ रहना सीखे"
 
बहुत समय पहले की बात हैं एक हस्ट फुस्ट दबंग व्यक्तितव वाला इंसान राज जी एक गॉव में रहते था उनके पास दौलत की कोई कमी नही थे जरूरत से भरपुर था राज जी का इज्जत सभी लोग करते थे गाँव में कुल 412 लोग रहते थे  पर उनके गाँव में स्कूल अस्पताल से दूर दूर तक अंजान थे उनका जीवन ख़ुशी ख़ुशी व्यतीत हो रहा था गाँव का मुखिया राज जी थे पर एक दिन वहाँ बाढ़ आ गया पुरी गाँव डुबने को था पर वह इंसान अपने फैमिली के साथ आगे बड़ जाने का सोच पर एक दफा उनके पुरे गाँव वाले का ख्याल आया इनका क्या होगा किसी से मदद् की उम्मीद नही थी , सोचा ये मेरे उच्चाई का सफर तय इनके कारण हैं नही तो मैं आज डुबता हुआ सितारा होता जब जरूरत से ज्यादा अनाज  इन्होंने मेरे गोदाम में डाले इन्हें छोड़ना उचित नही हैं पर कर भी कुछ नही सकता था अपने 2पुत्र और पत्नी के साथ गाँव से शहर की ओर चल पड़े लेकिन उन्हें रास्ते भर बात सताते रहा कि कैसे होंगे मेरे गाँव वाले उन्हें अंदर ही अंदर बहुत दुःख हो रहा था फिर कुछ दिनों बाद जब शहर से वह गाँव गए तब वहाँ देखे कि गाँव वाले सब कुशल थे उन्हें बड़ा अफसोस हुआ फिर पूछे यहाँ तो बाढ़ आई थी किसी की बचने की कोई उम्मीद नही थी फिर कैसे बच गए आप सब तब गाँव का बुज़ुर्ग बोलते है कि हम नही बचते अगर हम हिम्मत नही करते और  ये आपका मकान और गोदाम नही होता तो अंतिम समय सोच कर सब गोदाम और मकान के ऊपर कैसे भी करके चढे और 2दिनों तक बैठे रहे फिर जाकर पानी से बचाव कर पाये अंतिम घड़ी तक हम हौसले को खोने नही दिए तब राज जी रोकर बोले मुझे भी जाने का मन नही था फिर कर भी कुछ नही सकता था मुझे डूबता सुरज दिखने लगा था तब बुजुर्ग बोलते हैं कि बेटा  "आत्मविश्वास से लिया फैसला नई सीढ़ी चढ़ने के लिए जरूरत पड़ती हैं सफलता उसी के हाथ लगती हैं जो अंतिम श्वाश तक अपने कार्य के प्रति संघर्ष करता हैं"
"सत्य को डूबते हुए कभी अकेले नही छोड़ना चाहिए आखिर सत्य अंतिम घड़ी तक जीतने की हिम्मत करता हैं।"

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

सारांश

एक सारांश अमित चन्द्रवंशी"सुपा" की कलम से 📫📖📚

सच पुछे तो आज जिंदगी कहानी सी हो गई हैं जिसे देखो दो पल साथ होते हैं फिर आंधी की तरह आ कर चले जाते हैं दिल और दिमाक को भ्रष्ट कर देते हैं।बेजोड़ परिवर्तन के साथ संघर्ष करते हैं फिर एक दफा आता हैं जब ओवरटेक हो जाता हैं और इंसान इंसान से अपने स्वार्थ के लिए रह जाता हैं ये जिंदगी मुठभेड़ स हाथापाई हो गया हैं जिसे देखो तनाव से भरे होते हैं । अपने नैतिक जिम्मेवारी के चलते आपस में लड़ बैठे हैं सामूहिक रूप से सब एक दूसरे को दूर जाने को तैयार बैठे हैं अपनी विशिष्ट प्रतिभा को छोड़ सब दूरिया को मजबुती से निभाना सीख रहे हैं ये दौर बड़ी संवेदना से वयतीत हो रहा हैं अच्छे बुरे बने लगे हैं और बुरे लोग अच्छाई से मुँह मोड़ लिए हैं। कोई मसीहा तो आये जो एक दफा ये दुनिया वाले को ज्ञान से उर्जावान कर दे और मनुष्यबल को पुरूषार्थ का पाठ पढ़ाकर घमण्ड दोष और बुराईयो का चकनाचुर कर दे उस फरिश्ते का बेसब्री से इंतजार हैं जो एक दफा इस दुनिया में अच्छाई का पाठ पढ़ाये जिसे ये दुनिया वाले शांति से जीना सीख जाये तथा किसी से नीच और उच्च का भावना न हो और ये वादी प्रेम पवित्र वायु से संचरित सदैव रहे।

आशा कभी खोना नही चाहिए आज नही तो कल लक्ष्य से ओवरटेक करेंगे पर अपने लक्ष्य से मुँह मोड़ लेना सही बात नही हैं जो हारता है वही खड़े होने का हिम्मत करता हैं ।
"जब तक कमल की पत्ती पानी में तैरती रहती है तब तक उसका मान नही होता है जैसे ही उसमे कमल फुल खिलता है कमल का रेप्यूटेशन अत्यधिक हो जाता हैं ।"

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

मंगलवार, 23 अगस्त 2016

सारन्स

सारंस छत्तीसगढ़ी म अमित चन्द्रवंशी"सुपा" संग

पेपे ह एक ठन सहर म पढ़े बर आइच ओखर 12वी खत्म होगीच तहले ओह कुछ दिन सुरताइच तहले ओला एकोठन सुघ्घर आसन कालेज नई मिलीच त हो ह थोड़किन समय बाद पढ़े अऊ गढ़े बर कोचिंग पढ़ेला धारिच थोड़किन थोड़किन क्लास जायला धरिच तहले ओ ह संगी बनाईच अऊ ओखर संग घुमे ला धारिच तह ले ओखर भेट एक मनखे संग होगीच लेकिन ओखर बोले के तमीज बड़ा बेसुरा बतमिज किस्म के रहिच होकर संगी मन धीरे धीरे पढ़े लगीच तहले  एक दिन फेरे ओखर संगी बनीच पर ओखर व्यवहार ह बहुत घटिया हवय ख़ुद सबसन लड़ते अऊ कह दीच एक सुघ्घर टुरा ल की अहिच लड़वाये हवय बिचारा के कुछु गलती नही ह तभो ओला कह दिच लेकिन बेचारा बुरा नही मनीच मन के अबड़ सुघ्घर हवय धीरे धीरे क्लास खत्म होत रहिच सबके घर जाये के दिन आ गे सब झन चल दी एक दिन कौनो नई रुकय कोखरबर संगी बनानव लेकिन अपन स्वार्थ बर ओखर दिल ल मत घसिटव तेह करम करबे त तोला कुछु मिलहि ओला कुछु नई मिलय जीवन म तेह आगु बड़बे कबर कि सीढ़ी तेह चड़बे  तभे तोला बादर में उड़ाबे अऊ कहिबे जमीन ले सीधा बादर म उड़हु त गिर जबे तेह ओती के रहबे न ऐति के ।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
   छत्तीसगढ़ी सारंस

बुधवार, 17 अगस्त 2016

यार दिलेलगी तोड़ना भी पड़ा

Dedicated to Mansi
Miss U a lot 😢😢😢
Really I love u so much yar...

हमारी दोस्ती का अंत हो चुका हैं तोड़ना ही लास्ट आप्शन था मेरे पास और मेरे को सही भी लगा।।

दिल किसी से लगा बैठा था यारो
दिल जिसे लगी वह मेरी  जान थी
यादो को समेटने चला था रुख में
आज टूटना ही जिंदगी की रूठ में।

इतने दिनों तक तुम मुझे अंधरे में रखे और तो और
मेरा ब्रो भी वही किया मेरे साथ टूटने का
दर्द और डर था मुझे पर कर भी क्या सकता था
इश्क़ किया था यार तेरे से , गुमरहा नही जब
दिल से निकलना था तो दिल क्यों लगाई
बैठी थी मेरे से बात क्यों करती थी घण्टो
घण्टो तक फ़ोन पर बाते क्यों करती थी क्लास
में भी इग्नोर करना चाहा था तुझे पर मैं तेरे से
बहुत प्यार करता था तुझे चाह कर भी भुला
नही सकता हु तू मुझे भूल जायेगी पर मैं तुझे कभी
भूल नही सकता यार । गुमराह क्यों किया जब
तुझे पता था हर्ट बहुत ज्याद हो जाऊंगा मैं मुझे
झूठ के आड़ में क्यों रखी तू बेसक यार तुझे पहली
मुलाकत के वक़्त मुझे सिखाव दिला देना था
ना तेरे भाई आते मेरे पास और ना मैं उस दिन
टूटता तेरे से फिर भी आखिर में मैं झुका उस दिन
जो मैं तेरे से मोहब्बत जो करता था। मोहब्बत
तो आज भी है पर प्यार तूने क्या किया तूने तो
मुझे पूरी तरह तोड़ दिया । एक बार समझा देना
था पहली बार जब मिले हम आज इस तरह मैं आज
हर्ट नही होता आखिर कब तक गुमरहा करती तू
पता तो चला ना यार जब फ़ोटो क्लिक
किया बेसक मैं आज सबसे टूटने का इश्तहार कर
लिया हु । किसी को दोस्त नही सिर्फ
टाइमपास समझ बैठा हु अब दिल से विश्वास
हमेशा के लिए उड़ गया हैं।
अब मैं अपने रास्ते और तुम अपने रास्ते लेकिन अब किसी को इस तरह से हर्ट मत करना टूटने का दर्द बहुत गहरा होता है जिसे भरने में वक़्त लगता है और दिमाग तो पूरी तरह काम करना बन्द कर देता हैं।
Good bye dear....

यार...

इतने दिनों तक तुम मुझे अंधरे में रखे और तो और मेरा ब्रो भी वही किया मेरे साथ टूटने का दर्द और डर था मुझे पर कर भी क्या सकता था इश्क़ किया था यार तेरे से , गुमरहा नही जब दिल से निकलना था तो दिल क्यों लगाई बैठी थी मेरे से बात क्यों करती थी घण्टो घण्टो तक फ़ोन पर बाते क्यों करती थी क्लास में भी इग्नोर करना चाहा था तुझे पर मैं तेरे से बहुत प्यार करता था तुझे चाह कर भी भुला नही सकता हु तू मुझे भूल जायेगी पर मैं तुझे कभी भूल नही सकता यार । गुमराह क्यों किया जब तुझे पता था हर्ट बहुत ज्याद हो जाऊंगा मैं मुझे झूठ के आड़ में क्यों रखी तू बेसक यार तुझे पहली मुलाकत के वक़्त मुझे सिखाव दिला देना था ना तेरे भाई आते मेरे पास और ना मैं उस दिन टूटता तेरे से फिर भी आखिर  में मैं झुका उस दिन जो मैं तेरे से मोहब्बत जो करता था। मोहब्बत तो आज भी है पर प्यार तूने क्या किया तूने तो मुझे पूरी तरह तोड़ दिया । एक बार समझा देना था पहली बार जब मिले हम आज इस तरह मैं आज हर्ट नही होता आखिर कब तक गुमरहा करती तू पता तो चला ना यार जब फ़ोटो क्लिक किया  बेसक मैं आज सबसे टूटने का इश्तहार कर लिया हु । किसी को दोस्त नही सिर्फ टाइमपास समझ बैठा हु अब दिल से विश्वास हमेशा के लिए उड़ गया हैं।