गुरुवार, 17 मई 2018

पौनी पसारी

पौनी पसारी जाति के महत्व हमर छत्तीसगढ़ी समाज म जतका हवय वतके उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, ओडिसा म हवय। पौनी पसारी मन देखते देखत म बिसरत जावत हवय। राउत, नाउ, धोबी, लोहार, मोची, बईगा, कुम्हार इमन पौनी पसारी म आथे। जब भी कुछु काम होथे त राउत किसानहा या दाऊ मन घर पानी भरते, अउ पहठिया ह गाय-भैसी ल चराय बर लगथे अउ बरदी जोरथे। मरनी हरनी म रउतइन ह पानी कांजी ल भरते अउ बरा बनाये बर असुद्ध रहिथे घर परिवार वाले मन त दार ल पिसथे। राउत ह दीवाली तिहार म गोवर्धन पूजा म ओखर महत्व होथे ओ ह गोवर्धन खुंदवाये के काम करथे अउ बाद म खिचड़ी खावथे अउ मोर पंख लगाथे।राउत मन ल 1-2खाड़ी म लगाथे फेर अब पैसा घोलो देबर पढ़थे। समय बीतत हवय अउ उखर मांग भी बाढ़त जात हवय अब के बेरा म कोनो अपन पीढ़ी दर पीढ़ी कम ल नई करना चाहत हवय सबो झन येति कोति काम करत हवय सब मनखे मन अब अपन आप ल बदले के कोसिस करत हवय अउ सफल होवत हवय। नाऊ गांव म ही देखे बर मिलहि अउ सहर म नाऊ मन बड़का बड़का दुकान खोल डरे हवय, आगू किसान मन ल खोजत खार, बखरी, घर दुआर म खोजत जातिच अउ संवार बनातीच तेन ह बिसरत जात हवय। अउ अब कुछु भी काम धाम होथे त नावईन के काम ल घलो नाऊ ह कर देथे, अउ अपन नेंग ल ले लेथे तभे छोड़थे। पूजा हवन बर लकड़ी,दूबी, फूल पान सबके जुगाड़ नाऊ करय।नाऊ मन दोना पतरी बनातीच तेन ल बर बिहाव, मरनी हरनी, छठी म बउरतीच फेर मसीनी दुनिया म सब बिसर गय। धोबी के काम हरय कपड़ा धोये के फेर उखर अब्बड़ महत्व रहिस हवय, धोबी  मरनी हरनी म पूरा कपड़ा जतका ओढ़ना दसना रहिथे तेन ल धोते अउ घर के सुधि करथे। आगू सुहाग देके परम्परा तको धोबी मेर रिहिस हवय तेन ह बन्द होगे।मोची पनही बनाये के काम करथे अउ बाजा नगाड़ा म चमड़ा लगये के काम करथे, मोची ह मर जथे जानवर उखर चमड़ा ल बिन के काम करथे, अउ कोररा, पनही, बेल्ट, पर्स बनाये के काम करथे। कुम्हार ह दिवारी तिहार म दिया अउ मटका देके जावय। अक्ति म चुकलिया अउ मटका जेन म पानी भर के बगीचा, देवालय अउ बर पीपर पेड़ म रखथे, अउ मटका म छेद करके महादेव ऊपर अक्ति के दिन रखथे। पहली माटी के बर्तन म खाना बनय त कुम्हार ह किस्म किस्म के बरतन बनावय तेने म खाना बनय।  कुम्हार मेर अनेक प्रकार के कला रहिथे जेन कला ले मूर्ति, घोड़ा गाड़ी लाईक मनके खेले बर बनाथे, पुतरी-पूतरा बनाथे।लोहार ह अपन काम म महारत हासिल करे हवय, ओला सबो प्रकार के अब्बड़ अकन औजार बनाये बर आथे ; कुदरा, कुदरी, रापा, गेती, साबर, अउ खेती करे के किस्म किस्म के औजार बनाथे। लोहार ह अपन काम ल बखूबी करय फेर जब ले टेक्टर हारवेस्टर आए हवय तब ले उखर धंधा चोपट होगे हवय अउ उखर काम धीरे धीरे सिरावत हवय।बईगा के काम ल केवट मन करथे, महामाया, देवालय मन पूजा पाठ के काम इही मन करथे। जोत जवारा जलाये बोये के काम केवट मन करथे।आधुनिक सहर म आज रहत हवन त इंहा विकास जरूरी हवय समय के सात बदलाव जरूरी हवय। जेन मन ल भूल गेन ओ सिर्फ मसिनी दुनिया के सेती होय हवय।आधुनिक जीवन म सबो ल संरक्षित करना मुस्किल हवय तेखर सेती आने वाले पीढ़ी बर म्यूजियम खोले बर पड़ जहि अउ ओमा संरक्षित करे बर लगहि। आज रीत बदलत हवय, विकास बर बदलाव जरूरी हवय अउ तभे हमन विश्व म दूसर देश ले आगे बढ़बो नई त हमन पिछड़त चल देबो। वो बात भी जरूरी हवय की संस्कृति ल संजोके रखे बर पड़ही ओखर बर समाज ले बंध के रहे ल पड़ही।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
कवर्धा ,छत्तीसगढ़

बुधवार, 9 मई 2018

कश्मीर बदल रहा हैं

कश्मीर बदल रहा है

वो वादी जिसके पूरी दुनिया कायल है धरती में कोई जन्नत है तो वह सिर्फ कश्मीर है। कश्मीर की वादी बहुत मनमोहक है जो सभी को मन को भाँति है, यह भारत का एक ऐसा जगह है जहाँ सभी लोग घूमने जाने के ललायित होते है। धरती का स्वर्ग कहे जाना वाला कश्मीर दिन ब दिन बर्बाद हो रहा है, आखिर बर्बादी का राज क्या है यह सभी जानते है फिर भी मूक बने सब देख रहे है। अलगाववादी, नक्सलवादी तथा आतंकवादी आग की तरह बरप रहे है, सियासत की रोटी सेंकने में मशगूल है सभी आगे आने के नाम पर पीछे भाग रहे है, मसला तो वही है हल कहाँ है? दिन ब दिन हालात बतर हो रहा है, कभी पोलिश पर कभी CRPF के जवान कभी आर्मी ऑफिसर ऊपर पत्थराव हो रहा है लेकिन अब तो हद हो गई पर्यटक भी सुरक्षित नही है, एक ओर जहाँ हम सभी को कोश रहे है उधर दूसरी ओर रातोरात कश्मीर पंडित को खदेड़ दिए। सियासत की आंधी में सब झुलस कर रह गये, मौत के सौदागर आज भी जीवित है, कश्मीर का विलय रियासतों के एक करने में किया गया था जिसे सभी जगह का विकास हो सके लेकिन आज कश्मीर रोती बिलखती नजर आ रही है, मनमोहक वादी श्रीनगर का वह सुंदर दृश्य मन को मोह लेती है।

सत्ता चले जाये लेकिन देश का मान, इज्जत, विकास में बाधा नही आनी चाहिए, रोटी कपड़े और मकान सभी को चाहिए, कश्मीर में भी वही चाहिए लेकिन मौत के सौदागर सियासत की रोटियां सेंकने की काम क्यो कर रही है? आम जनता का हाल जनता तय करेगी सरकार नही, जवान की जो दशा कश्मीर में ही लानत है सियासत की कुर्सी में बैठने वाले पर, दोष देने के बाजये किसी को कोषने के बजाये काम करना चाहिए। अब सत्ता के लालची लोगों को उखड़ फेकने का समय है, वह वक़्त नही रहा की जुल्म होता रहे आवाज न उठाये, वो वक़्त नही रहा की शांत खड़े होकर देखते रहे अब एक्शन का वक़्त है कुछ भी करे तो पलटवार जवाब हमारे एक भाई शहीद होते है तो आतंकवादी और नक्सलवादी के हजार साथी को मार गिराना और बाधक को जड़ से मिटाना चाहिए।

देशभक्त हम एक बात से तय कर लेते है कि देश के साथ कौन कौन खड़ा है तो बात गलत है क्योंकि एक देशद्रोही भी कहता है कि मैं आजादी चाहिए , किस बात की आजादी आपस मे हम सबको लड़ाने के आजादी और देश को जरा जरा में बिखेर देने की आजादी। आजादी का सही मतलब हम आज कहि न कहि भूलते जा रहे है आकांक्षा मिश्रा जी को वो लाइन कानों गूंजता है "इतिहास में इतने रक्त बह चुके है कि अब देश बलिदान नही विकास मांग रही है।" खास ये बात सभी को समझ आ जाये तो देश में ये हाल नही होता और सियासत की रोटी नेता लोग भी न सेंक सके और शांतिपूर्ण तरीके से देश का विकास हो सके।

मंगलवार, 8 मई 2018

बीते कई साल हो गए

कानों में आवाज आज भी गूंज रहा हैं

वीरान जंगल में बैठे, चारो ओर सिर्फ जंगल ही जंगल है, दूर दूर तक कुछ नही लगभग 10किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा था जहाँ बाल काटने जाता और जरूरत का समान खरीदते थे। स्कूल के चार दीवारों से निकले तो हॉस्टल तक का सफर था हॉस्टल भी स्कूल कैंपस में था सुबह उठकर पढ़ने बैठते फिर नास्ता करते फिर स्कूल जाते कक्षा तीसरी की बात है फिर वापस आते 3बजे फिर 3 बजे के आसपास नहाने जाते फिर 4बजे तक वापस आते फिर 4 बजे कुछ काम करते और 8बजे खाना खाकर सो जाते। वह जगह बहुत ही पिछड़ा हुआ है आज भी कोई बदलाव नही हुआ है शायद सड़के बन गई है और नदी में पुल बने है उसमें तो बहुत बड़ा घोटाला हुआ था वह ढह गया था फिर उसे लकड़ी के सहारे खड़ा किये हुए थे। न जाने का जिद्द और घर से दूर न होने की आस हमेशा रोते रोते जाते कभी कभी किसी को काट देता तो कभी किसी के ऊपर पानी डाल देता था। एक और बात थी गर्ल्स हॉस्टल में क्लास 3rd तक रहना होता था फिर बॉयस हॉस्टल। एक लड़की थी उसका मिक्चर खा लिया था बिना पूछे उस तब तक पैसा देते रहा जब तक वार्षिक परीक्षा नही हुआ। उस समय मेरा कोई दोस्त था वो शालानायक थे और वह 12वी में था आज वह एक पत्रकार है लंच के समय डैली में उनके हॉस्टल मतलब बॉयस हॉस्टल जाता था अक्सर वो मुझे कुछ न कुछ खाने को देता था। कोई मेरा साथी था तो वही था जो मेरा हर बात मानते और जब मैं रोता तो मुझे शांत कराते। वो पल मैं कभी नही भूल सकता लेकिन यादे आज भी जहन में जकड़ कर रह गई है। यादे तो बहुत है लेकिन मैं उनको भूल गया था कुछ साल बाद लगभग 10सालो बाद उनसे मुलाकात सोशल साइट्स में हुआ देखा दोबारा कभी नही अब तक।

साल बिता गया और 4th क्लास में आ गया और बॉयस हॉस्टल में रहने लगा।जहन में वही बाते रह गई थी, सुबह उठते 5बजे फिर चर्च जाते फिर आते 7बजे वापस आते और नास्ता करते फिर नास्ता के बाद पढ़ते फिर 9बजे स्कूल जाते फिर लंच में आते और लंच करते फिर स्कूल और 3बजे वापस आते और 1घण्टा काम करते कोई चावल साफ करता तो कोई खेत मे कोई पौधों में पानी डालते तो कोई सब्जियों में। इसी तरह काम होता था जो सब करते थे फिर 4 से 5 खेलते थे फर 5 बजे नहाने जाते नदी। नदी का बहाव बहुत मजा आता था पानी ठंडी ठंडी मस्त रहता था चारों ओर जंगक ही जंगल दूर दूर तक कोई दिखाई नही देता था 6बजे चर्च जाते और आधा से एक घण्टा बाइबिल पढ़ते फिर वापस आकर खाना खाते फिर 9:30PM तक पढ़ाई करते फिर सो जाते लेकिन मुझे जल्दी नींद आती थी बहुत छोटा था मैं उस वक़्त। डिमांड किये जल्दी सोने के लिए मुझे जल्दी सोने को मिल जाता था बाकि लोग पढ़ते थे मैं सोते रहता था। बहुत बड़ा स्टडी रूम था वहाँ पढ़ते  ब्रदर निगरानी करते रहता था। एक वाशरूम था वो 9बजे खुलता और 6बजे बन्द हो जाता था बाहर के वाशरूम बाकि समय उपयोग करना पड़ता था। इस तरह साल बीत गया और 5th क्लास की यादे जो भी है और शायद मेरे जहन में मरते तक रहेगा। वो कड़वाहट जिसे मैं मन में दबा कर अबतक रखा हु स्टडी करता था और बोर्ड क्लास था पता नही मैं कैसे उसे हां बोल दिया 5 रुपये की लालच में अपना ईमान बेच दिया। ये बाते आज भी मुझे झकझोर कर रख देती है पता नही मुझे वो जगह आज भी हमेशा दिखाई देता है, न जाने कब तक मेरे राह में वो एक अजीब मोड़ ने पैर बदल दिए न जाने क्यों मैं उसके साथ पढ़ने बैठ गया। उसे मैं दोबारा जिंदगी में कभी मिला और न मैं मिलना चाहता था गुंडा की तरह बदमाश दिखता था आपने बातों में मुझे समेट लिया उसकी बात आज भी मन में सिकुड़ कर रह गई है आज भी वो बाते कानों में गूंजती है न जाने कब तक उस बात से मुझे चीड़ होगी, एक तूफान स मोड़ जिंदगी ने ली और शायद उस जगह मैं कभी दोबारा नही गया। मेरी याद ताजा न हो कि डर से मैं जिंदगी में उस वो जंगल मे कभी न जाऊ जहाँ से दूर दूर तक सिर्फ जंगल ही जंगल दिखता हो।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर, कवर्धा, छत्तीसगढ़
मो.-8085686829