गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

एक दशक में बदलाव

आज मानव मानव में चक्रवात उत्पन्न हो गया है
मानव मानव का बुराई करने में तुला है
कल तक प्यार बाटने वाले आज दुःख देते है।
बस कुछ साल पहले घर में कोई आना अच्छा था,
आज वह बुराई में ताब्दिल होगया।
वह दिन चला गया
आज भी हम वही है
आज सिर्फ हमारे मन और उम्र में परिवर्तन हो गया है।
आज पडोसी के घर किसी की मृत्यु हो जाये
मन की मानकर खड़े होकर देखते है और कहते है अच्छा हुआ चले गया।
आज खुशिया में साथ देने के लिए खड़े होते है तो सर्फ उसमे हमारा स्वार्थ होता है।
आज मानव मानव में कठोर युद्ध हो रहा है
कल तक किसी और के लिए जीते थे आज खुद के लिए जी रहे है।
समय परिवर्तीत हो रहा है मानव के दशा बदल रहा है।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

एक कदम किसान की सुख की ओर

मंजिल तक जाना है, तो अन्न चाहिए
जीवन जीना है, किसान को प्यार चाहिए।

कब तक फसल बर्बाद होगा और कब तक जल की किलत होगा?
कब तक किसान मरता रहेगा? किसान को इंसाफ चाहिए।

मैं तो मात्र किसान हु, और धरती माँ का सेवक हु।
इसलिये अच्छे पैदावार के लिए जल चाहिए।

जल नही है हमारी भरपाई कौन करेगा ये मैं आपसे सावल पूछता हु।

जल कही खो गया है कल बंजर जमीन को उन्नतशील बनया आज वह बंजर में फिर तब्दिल होगया।

एकदिन मानव की सभ्यता खत्म हो जायेगा, जिस दिन अन्न की किलत हो जायेगा।

मेरी तो पूरी जिंदगी सिमट गई है,
आज मेरे खेत में सिर्फ सुखी मिट्टी है।

किसान था खेती करना मेरा धर्म था,
लेकिन आज मै जल के लिए गरीब हो गया।

अन्न को बचा ना सका आज जल की कमी हो गई,
धरती माँ पर आज मैं बोझ हो गया
इसलिये धरती माँ को आलविद् कहा दिया।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

नन्ही सी जान असमय ही खो जाना

इस दुनिया में आके तुरन्त चले जाना असमय मृत्यु है।

असमय ही मृत्यु मानव के वेदना है,
दुनिया को ना देखना सबसे बड़ी गुनाह है।

आपने पीछे पूरा संसार छोड़ देना,
नन्ही जान बहुत अनमोल थी।

आपने तो इस दुनिया को देखा ही नही,
फिर इस दुनिया से कैसी नफरत जो आप चले गई?

आपकी प्ररेणा दुनिया में राज करने के काबिल था,
हम आपसे बहुत दूर है।

सुखमय धरती की राजकुमारी थी,
लेकिन भगवान ने आपको धरती से छिन लिए।

आप माँ बाप के सपनो के तरह इस दुनिया में आई,
और असमय ही इस दुनिया से वीरन हो गई।

आपकी वीरता एकदिन दुनिया में छा जाती,
लेकिन कुदरत ने आप पर मेहरबान नही हुए।

आप चले गई दुखो का क्रम छोड़ गई,
लेकिन माँ बाप की खुशिया कहि खो गई।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015