गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

उदय और अस्त इंसान के हाथ में है

उदय और अस्त इंसान के हाथ में है

दुनिया के तमाम देश के डॉक्टर नावेल कोरोना वायरस के दवा या वैक्सीन बनाने में लगे हुए है, मानवीय सभ्यता का उदय के बाद यह एक पहली लड़ाई जो सभी देश अपने घर मे खुद से खुद लड़ रही है। सभ्यता का उदय और अस्त मानव के हाथ मे हमेशा से रहा है, उसके पीछे सारी दुनिया है। मानव ने विकास के अनेक परिभाषा दिये लेकिन सभी विकास की रूपरेखा अलग अलग है समय के साथ विकास में फेरबदल हुआ। 

आज सभी सम्पन्न, विकसित और विकासशील देश नावेल कोरोना वायरस से झुंझ रहा है, ज्यादातर देश हाथ खड़ा कर दिया है, विश्व महामारी में देश की सीमा देखना उचित नही होगा, इतिहास से हमे बहुत कुछ सीखने को मिला है ऐसे में इतिहास को साक्षी मनाकर हमे आज अपने घर को पहले देखने की जरूरत है, अगर हम सक्षम है तो दुनिया को रास्ता दिखा सकते है। सरकार के काम पर हस्तक्षेप न करते हुए उनके साथ खड़े होने की जरूरत है। 

विश्व मंदी कि ओर बढ़ रहा है वही महामारी ने लाखों लोगों की जान ले ली है वही मरीजो की संख्या कम होने के बजाए आय दिन बढ़ रही है। विश्व मंदी 1929 में अमेरिका के स्टॉक मार्केट क्राइसिस से शुरुआत हुई और उस समय मृत्युदर अवसाद से बढ़ी, विश्व आर्थिक मंदी का लंबे दौर तक रहा द्वितीय विश्व युद्ध के समय लाइन में आया। अवसाद से मृत्युदर बढ़ी, जीने के लिए आज लोगो को मेन्टल स्ट्रेंग्थ पर काम करने की जरूरत है, रोग प्रतिशोधक क्षमता बढ़ाये जाने से लड़ सकते है। धैर्य, साहस, सौम्यता, विज्ञान, एकजुटता, विज्ञान व अनुभव आदि से लड़ने की जरूरत है।

आज भारत की स्थिति USA और यूरोपीय देशों से बेहतर है, कोरोना ग्रोथ चार्ज कम हुई। हेल्थ इंस्ट्राफ्रैक्चर हमारी बेहतर है, कोरोना राइजिंग कर्व को नीचे लाने के लिए ट्रीटमेंट अच्छा हो, वायरस हमेशा से एक कदम आगे होता है, ऐसे में कोई भी देश पहले से तैयार नही होता है लेकिन भारत सभी चीजों से लड़ने के लिए तैयार खड़ा था इसी के बदौलत हम आज इतने दिन तक टिक पाये, कोरोना का कहर आग की तरह बरपा है जिसे निकलने में वक़्त लगेगा।

कम संसधान में युद्ध लड़ना आसान नही होता है लेकिन मुस्किल भी नही, वैचारिक दृष्टि से हमे आपस मे सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है, घरों में रहना आसान नही है लेकिन आज चैन को तोड़ने के लिए घरों में रहना और नियमित दिनचर्या में जीवनयापन करने की आवश्यकता है, इमरजेंसी होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए नही तो जीतने समान है उसी में सर्वाइव करने की जरूरत है, हम जीवन के उस पड़ाव में है जहाँ मौत को हम खुद बुलाएंगे, ऐसे में कोरोना से लड़ने के लिए एक साथ खड़े होने की जरूरत है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

सुर्खियों के चक्कर मे तैर रही थी लाश : टाइटैनिक

सुर्खियों के चक्कर में तैर रही थी लाश : टाइटैनिक 

मानवीय सभ्यता का विकास का यह दौर इतिहास में हमेशा याद किया जायेगा, 1912 में जो घटना समुद्र में घटी उसके लिए किसी एक को दोष देने से अच्छा है सुर्खियों में रहने वाली जहाज को दोष देना उचित है। कभी न डूबने वाली इतिहास का भाप से चलने वाला उस वक़्त का सबसे बड़ा जहाज टाइटेनिक अपने पहली सफर साउथम्पटन से न्यूयॉर्क जाते वक्त ही जल के तल में समा गई। इतिहास का वह काला दिन सभी के जहन में आज भी जिंदा है। "समुद्र का दिल" हीरा समुंदर की लहरों में खो गई, विरासत में टाइटेनिक के मलबे के सिवाय कुछ मिला तो वह उस दिन प्रेस वालो को सुर्खियों का खजाना, प्रथम पृष्ठ में बड़े बड़े अक्षरों में कभी न डूबने वाली जहाज का भयानक अंत, खौपनाक मंजर जिसे दिल सुनकर कांप जाये। 20वी सदी की सबसे बड़ी समुद्री आपदा जिसे याद कर रूहे कांप जाती है, वह मंजर कभी देखने को न मिले। भाप से चलने वाली उस समय की सबसे बड़ी जहाज, कभी न डूबने वाली हमेशा सुर्खियों में रही, अपनी यात्रा 10 अप्रैल 1912 के चार दिन बाद 14 अप्रैल 1912 जल समाधि बन गई। बर्फ की चट्टान मिलने के बाद भी तेज रफ्तार से दौड़ रही थी, वक़्त रहते मोड़ने का अनुमान, एक कीर्तिमान स्थापित करने के लिए, एक बार मे समय के पहिया को समेटना चाहते थे, दूरियां को चंद घण्टे पहले तय करने की जिद्द 1517 निर्दोष को साथ मे लेकर टाइटैनिक डूब गई, इतिहास का सबसे बड़ी दुखद घटना में से एक है जब इतने लोग समुन्दर की लहरों में खो गये, किसी का ऐतेबार नही किया। रेडर भी काम नही आया और तो और उस जमाने के नामचीन इंजीनियर, एक्सपर्ट और डिज़ाइनर आदि की  कीमित देन अपनी पहली यात्रा के दौरान ही अपनी अंतिम यात्रा किया जिसका जिक्र हमेशा होगा, 4चिमनी प्रभावशाली रूप देने के लिए लगाए गए थे जिसमें तीन ही काम करता था। प्रेस के लिए सुर्खियों में हमेशा रही। 1500 लोग के साथ टाइटेनिक दफन हो गई, जब टाइटेनिक डूबी उस वक़्त 6 लोगो को बाद में सभी नावों को आपस मे जोड़कर रक्षा दल आई तब बचाये उस ठंडे पानी मे महज 20मिनट तैरना मुश्किल था पानी बहुत ज्यादा ठंडा था, बच पाना नामुमकिन था। नाव में 700 लोगो को सिर्फ इंतजार करना था, अपने मुक्ति के लिए जो उन्हें कभी न मिली, अपने आंखों के सामने समुन्दर में समाते हुए लोगो का दर्द दफन हो गई। टाइटैनिक कीमतें चीजों से बना था, उस जमाने के सारे विशेषज्ञों के राय एक जहाज बनाने के लिए जो जरूरत होता है उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया था, वह सभी चीजें जरूरत के चीजे शामिल किया गया था। ये आपदा मानवीय संवेदना की याद हमेशा दिलाएगी, यह समुद्री आपदा ही नही बल्कि समय का चक्रव्यूह था जो काल बनकर आया था जो कभी न डूबने वाली टाइटेनिक को पहले सफर में ही ले डूबी। इतिहास में इसका जिक्र बहुत है लेकिन औरत के जज्बात समुन्दर की गहराई के सामने है, टाइटेनिक को समझना आसान नही है इसे महसूस कर सकते है, बहुत रिसर्च हुआ और होता रहा है इतिहास में इसे झुठलाया नही जा सका, समय के पहिया में टाइटेनिक हमेशा के लिए कैद हो गया है, हार्ट ऑफ ओसियन समुन्दर की लहरों में खो गई, हार्ट ऑफ ओसियन को पाने की इच्छा रखने वाले वैज्ञानिको ने बहुत खोज किया लेकिन रॉस महिला यात्री जिसके मंगेतर के जैकेट में होता है उनके हाथ लग जाता है वह अपने उम्र के अंत समय में एक रीसर्च के दौरान समुन्दर के लहरों में जहाँ टाइटेनिक डूबा रहता है वहाँ फेंक देती है समुद्र की लहरे उसे अपने आप मे आगोश लेती है। प्रेस के सुर्खियों में हमेशा के लिए छाप छोड़कर गया और इतिहास का भयानक आपदा मानवीय जीवन का एक मौत भरी रात रही थी समुन्दर की गहराई में सभी चीज समा गया। सुर्खियों में रहने वाला टाइटैनिक जीवन मे जहाजों का सफर का एक असवाल पैदा करने वाला पल रहा है, सभी विशेषज्ञों की विचारों को मात दे गई, एक गलती समय को कैद करने की विशाल जहाज को लेकर डूब गई। नौका दल कम थी लोगो को बचाना मुस्किल था कोई दूसरी जहाज घण्टो दूर थी ऐसे में जो बचे थे उनको मौत से कोई नही रोक सकती थी 6 लोग जो बचे वह ठंडे पानी मे टीके रहे जब नौका बचाव दल आई बाकी सभी लाश बनकर तैर रही थी, इतिहास को कैद करने वाला समय, विरासत में विशाल टाइटैनिक का मलबा और साथ मे बहुत से लोगो को अंत की कहानी के सिवाए कुछ नही मिला। 

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"